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चेतावनी: वायु प्रदूषण के कारण करीब 8 साल तक कम होती जा रही है औसत आयु, दिल्लीवासियों के लिए सबसे ज्यादा खतरा

Abhilash Srivastava अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Tue, 14 Jun 2022 04:07 PM IST
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India's average annual particulate pollution has increased by 61.4% shortening lives by almost 10 years
वायु प्रदूषण के कारण बढ़ता खतरा - फोटो : istock

पिछले एक-दो दशक के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि गत 20 साल में लोगों की जीवन प्रत्याशा में काफी कमी आई है। जीवन प्रत्याशा का मतलब हमने अब तक जितनी जिंदगी जी ली और इसके बाद जितना शेष है,उसके औसत से है। घटते जीवन प्रत्याशा के कारणों पर गौर करें तो इसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारकों को जिम्मेदार मानते हैं, जिसमें से बढ़ता वायु प्रदूषण एक है। वायु प्रदूषण जनित कई तरह की गंभीर बीमारियों ने लोगों की औसत आयु को कम कर दिया है, आने वाले दिनों में इससे होने वाले गंभीर जोखिमों का खतरा और भी बना हुआ है। 



इसी से संबंधित एक अध्ययन में शिकागो विश्वविद्यालय स्थित ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) के शोधकर्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि साल 2013 से  दुनियाभर में प्रदूषण के आंकड़ों में 44 प्रतिशत वृद्धि अकेले भारत से हुई है। साल 1998 के बाद से भारत के प्रदूषण सूचकांक में 61.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बड़े खतरे का संकेत है।

बढ़ता वायु प्रदूषण न केवल कई तरह की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा रहा है साथ ही इससे लोगों की औसत आयु में भी कमी देखने को मिल रही है। आलम यह है कि अगर वायु प्रदूषण इसी तरह से जारी रहा तो करीब 50 करोड़ भारतीय लोगों की औसत आयु 7.6 साल तक कम हो जाने की आशंका है।

India's average annual particulate pollution has increased by 61.4% shortening lives by almost 10 years
वायु प्रदूषण से कम होती जा रही है जिंदगी - फोटो : Pixabay

उत्तर भारतीय लोगों के लिए बड़ा संकट

वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) के हालिया विश्लेषण के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारतीय लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा पांच साल तक हो गई है। उत्तर भारत के इलाकों में इसका जोखिम और अधिक देखा जा रहा है। शोध से पता चलता है कि इस हिस्से में रहने वाली 510 मिलियन से अधिक की आबादी, जो कि देश की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत है उनके लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण का स्तर अभी की ही तरह बना रहता है तो इस आबादी की औसतन जीवन प्रत्याशा 7.6 वर्ष तक कम हो सकती है। 
 

India's average annual particulate pollution has increased by 61.4% shortening lives by almost 10 years
प्रदूषण के कारण बढ़ रही हैं कई तरह की बीमारियां - फोटो : istock

भारत, दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश

वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण को लेकर किए गए विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने बताया कि बांग्लादेश के बाद भारत, दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश है।  इतना ही नहीं देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बहुत ही बुरा है। अध्ययन के अनुसार दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की औसत आयु 10 साल तक कम होती जा रही है।

इसी तरह से देश के कई अन्य राज्यों का हाल भी बहुत बुरा है। शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत की बड़ी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती हैं जहां का 'एनुअल एवरेज पार्टिकल पॉल्यूशन' डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों से कहीं अधिक है, इसका सीधे तौर पर सेहत को असर हो रहा है। 

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India's average annual particulate pollution has increased by 61.4% shortening lives by almost 10 years
प्रदूषण ने बढ़ा दिया है कई तरह का जोखिम - फोटो : Pixabay

धूम्रपान से कहीं अधिक हानिकारक है वायु प्रदूषण

अध्ययन में बताया गया है कि भारत की 63 प्रतिशत से अधिक आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां की वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में देखा जाए तो इसका बढ़ना मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे इलाकों में लंबे समय तक रहने वाले लोगों की औसत आयु 5 साल तक कम होती देखी जा रही है। धूम्रपान के कारण विशेषज्ञ जहां जीवन प्रत्याशा को 1.5 वर्ष कम होता मानते हैं, वहीं वायु प्रदूषण के कारण यह 1.8 वर्ष के करीब देखी जा रही है।

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India's average annual particulate pollution has increased by 61.4% shortening lives by almost 10 years
प्रदूषण कारकों से बचाव बहुत आवश्यक - फोटो : istock

दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा खतरा

अध्ययन के निष्कर्ष में विशेषज्ञों ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण जितना बड़ा संकट दक्षिण एशिया में देखा जा रहा है, ऐसा और कहीं नहीं है। यदि प्रदूषण का मौजूदा उच्च स्तर कुछ वर्षों तक ऐसे ही बना रहता है तो आने वाले वर्षों में इसके और भी घातक परिणाम देखे जा सकते हैं। यह कई तरह की महामारी और बीमारी को बढ़ावा देने के साथ लोगों की औसत आयु को घटाता ही जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस खतरे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, यह मानव अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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