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Heart Attack: पिछले पांच साल में इतने क्यों बढ़ गए हैं हार्ट अटैक के मामले? विशेषज्ञों से समझिए इसकी वजह

Thu, 03 Oct 2024 01:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 03 Oct 2024 01:04 PM IST
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

हृदय रोगों का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ता हुआ देखा जा रहा है, कम उम्र के लोग यहां तक 20 से कम आयु वालों में भी इसका जोखिम देखा जा रहा है। आप भी अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की घटनाओं के बारे में सुनते-पढ़ते होंगे। हाल के वर्षों में ऐसी खबरें अधिक सुनने को मिल रही हैं।



गुरुवार (तीन अक्तूबर) को भी ऐसा ही मामला सामने आया जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री और सुरनकोट से भाजपा उम्मीदवार सैयद मुश्ताक अहमद बुखारी का हार्ट अटैक से निधन हो गया, वह 75 वर्ष के थे। इससे पहले मंगलवार (एक अक्तूबर) को हैदराबाद में एक शोरूम में खरीदारी करते समय 37 वर्षीय व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

हार्ट अटैक को लेकर सामने आ रहे आंकड़े काफी डराने वाले हैं। नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स (एनसीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2019 में 18 से 44 वर्ष की आयु के केवल 0.3% अमेरिकी वयस्कों को दिल का दौरा पड़ा था। इस आयु वर्ग में हार्ट अटैक के मामले अभी भी दुर्लभ माने जाते हैं, हालांकि पिछले चार-पांच वर्षों में इसमें काफी वृद्धि हुई है।

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युवाओं में हृदय रोगों के मामले - फोटो : Freepik.com

युवाओं में बढ़ रहा है खतरा

एनसीएचएस डेटा से पता चलता है कि वृद्ध लोगों में दिल के दौरे कहीं अधिक आम माने जाते रहे हैं, पर कई कारणों से युवा आबादी भी इसका शिकार होती जा रही है। कोलंबिया विश्वविद्यालय में हृदय रोग विशेषज्ञ और महामारी विज्ञानी डॉ. एंड्रयू मोरन कहते हैं, दुनियाभर में बढ़ते हार्ट अटैक और हृदय रोगों के मामलों के लिए मोटापा की समस्या को एक कारक माना जा सकता है। वैसे तो मोटापा का समस्या सभी आयु वर्ग के लोगों में देखी जा रही है पर युवा आबादी में इसका जोखिम ज्यादा बढ़ गया है।

अगर वजन को कंट्रोल कर लिया जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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हृदय की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

महामारी के दौरान बढ़ गया जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना महामारी ने कई तरह से हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में लोगों की शारीरिक निष्क्रियता बढ़ी, जिसने मोटापा और इसके कारण हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि कोविड-19 ने हृदय प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। संक्रमण का शिकार रहे कई लोगों में मायोकार्डिटिस की समस्या देखी गई है। हृदय की मांसपेशियों पर वायरस के दुष्प्रभावों ने क्रोनिक हृदय संबंधी मामलों को जन्म दे दिया है।

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बच्चों में हृदय रोगों के मामले - फोटो : Freepik.com

डरा रहे हैं आंकड़े

एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड महामारी के पहले दो वर्षों के दौरान 25 से 44 वर्ष की आयु के लोगों में दिल के दौरे से होने वाली मौतों की संख्या अपेक्षा से 30% अधिक थी। इसी तरह से एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि यूएस. में हर 100 में से चार लोगों में कोविड से ठीक होने के एक वर्ष में दिल से संबंधित कोई न दिक्कत हुई है।

बढ़ते जोखिमों को देखते हुए हृदय रोग विशेषज्ञों ने कहा, हमें मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसे जोखिम कारकों पर ध्यान देना होगा, जो युवा वयस्कों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

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हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक सर्जन डॉ निरंजन हिरेमथ कहते हैं, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले पहले भी होते रहे हैं पर अपेक्षाकृत अब इसकी रिपोर्टिंग ज्यादा है। निश्चित ही कोरोना महामारी ने हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और पिछले कुछ वर्षो में इससे मौत के मामले भी बढ़े हैं। मोटापा, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और धूम्रपान जैसी आदतों को कम करके आप अपने जोखिमों से बचाव कर सकते हैं। 

ये सोचना कि हृदय रोग सिर्फ उम्र बढ़ने पर ही होते हैं, ये सबसे बड़ी भूल है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोगों को इससे बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Young people are more likely to die of heart attacks post-COVID,


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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