यह वर्ष किसी के लिए भी आसान नहीं रहा है। सभी लोग कोरोना के कारण बहुत परेशान रहे हैं। जिन लोगों को खुद को कोरोना हुआ या घर के किसी सदस्य को कोरोना हुआ है, उनके लिए तो चिंता का अंबार था ही लेकिन जिन्हें कोरोना नहीं भी हुआ वे भय से इस तरह ग्रस्त हो गए कि अवसाद का शिकार हो गए। एक महीने में सभी के जीवन में कुछ दिन ऐसे आ रहे हैं जब इंसान चिढ़चिढ़ करने लगता है। यह चिंता और डर आगे चलकर अवसाद का रूप ले लेता है। इस अस्थायी अवसाद के हम सभी आदि हुए जा रहे हैं। कुछ भी अच्छा न लगना, किसी काम में मन नहीं लगना, किसी से बात न करने का दिल करना, हताशा महसूस होना आदि इस तरह के मौसमी अवसाद के आम लक्षण है। यदि यह अवसाद किसी की आदत बन जाता है तो आगे चलकर यह बहुत समस्याएं खड़ी कर सकता है। अगली स्लाइड्स से जानिए इस तरह के अवसाद से बाहर आने के कारगर तरीके।
कोरोनाकाल में यदि आप भी बार-बार हो रहे हैं अवसाद का शिकार तो आजमाएं ये 5 तरीके
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नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं
यदि आपको कोई बात साल रही है तो कभी भी उसे किसी नकारात्मक व्यक्ति से साझा न करें। नकारात्मक व्यक्ति उस बात को राई का पहाड़ बना देगा। फिर आप उस विषय में और भी अधिक सोचेंगे और वह आपका सिर दर्द बन जाएगी। जो लोग कोरोना से जुड़ी नकारात्मक बातें, डर और चिंता वाली बातें अधिक करते हों, उनसे दूरी बनाना बहुत जरूरी है नहीं तो आप अवसाद से बाहर नहीं निकल पाएंगे।
मन न हो तब भी करें
यदि आपने कोरोना के विषय में या भविष्य को लेकर बहुत अधिक सोच लिया है तब तो आप अवसाद की रेखा पर पहुंच ही गए हैं। ऐसे में यदि आप मनोध्यान को भटकाने का प्रयत्न करेंगे, तब भी कुछ नहीं होगा। लेकिन कोशिश आपको करना होगी। ऐसे समय में आपको कोई प्रेरणादायी किताब पढ़ना या लयबद्ध संगीत सुनना चाहिए। शुरू में ये थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन कुछ ही देर में आप बेहतर महसूस करने लगेंगे।
श्वसन क्रिया
सांस तो सभी ले रहे हैं लेकिन अवसाद की इस स्थिति में आपको इसका अभ्यास अलग तरह से करना होगा। आंख बंद करके शांत जगह पर बैठें, हल्का और मधुर संगीत चलाएं, अब अपनी लंबी गहरी सांस लें, थोड़ी देर रूकें और फिर उसे धीरे- धीरे छोड़ें। ऐसा 15 से 20 बार करें। थोड़ी ही देर में आप खुद अंतर देख पाएंगे।
छोटे बच्चों के साथ खेलें
यदि आपके आस-पास कोई छोटे बच्चे हैं तो अवसाद की इस स्थिति में उनके पास जरूर जाएं। उनके साथ थोड़ी देर खेलने, उनसे बात करने या सिर्फ उन्हें थोड़ी देर के लिए देखनेभर से आपका चित्त शांत हो जाएगा और सिर का भारीपन भी ठीक होने लगेगा। छोटे बच्चे आपको सकारात्मक ऊर्जा से भर देंगे।