देश में कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है और इस बीच तीसरी लहर का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि इस महामारी के खिलाफ तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक 47 करोड़ से अधिक कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं और हर दिन लाखों की संख्या में लोगों को टीके लगाए जा रहे हैं। इस बीच वैक्सीन को लेकर हुए एक नए अध्ययन में यह दावा किया जा रहा है कि स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन कोरोना के डेल्टा, डेल्टा एवाई.1 और बी.1.617.3 वैरिएंट्स पर भी प्रभावी है। अध्ययन के मुताबिक, भारत में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस टीके ने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ 65.2 फीसदी सुरक्षा दिखाई है। यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर द्वारा किया गया है और इसे मेडरिक्सिव नामक प्री-प्रिंट पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
अच्छी खबर: कोरोना के इस खतरनाक वैरिएंट पर भी प्रभावी है भारत की ये वैक्सीन, अध्ययन में दावा
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दरअसल, कोरोना के एवाई.1 वैरिएंट को ही डेल्टा प्लस कहा जाता है। अध्ययन के मुताबिक, इस वैरिएंट का पहली बार भारत में अप्रैल 2021 में पता चला था और बाद में 20 अन्य देशों से भी इसका पता चला था। भारत में अब तक इसके 70 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इसे बेहद ही खतरनाक माना जा रहा है।
#IndiaFightsCorona@ICMRDELHI study shows #COVAXIN is effective in Delta, Delta AY.1 and B.1.617.3 variants.
#LargestVaccinationDrive #We4Vaccine
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की कोवाक्सिन को भारत के साथ-साथ 16 अन्य देशों में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है, जिसमें ब्राजील से लेकर फिलीपींस, ईरान, मेक्सिको आदि शामिल हैं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी ड्रग कंट्रोलर से इसे इस्तेमाल की मंजूरी अब तक नहीं मिली है।
कोवाक्सिन की खासियत क्या है?
- दरअसल, कोवाक्सिन एक इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है, जिसे बीमारी पैदा करने वाले वायरस को निष्क्रिय करके बनाया गया है। इसका मतलब ये हुआ कि यह संक्रमण नहीं फैला सकता। यह वैक्सीन प्रतिरक्षा तंत्र को असली वायरस को पहचानने और संक्रमण होने पर उससे लड़कर उसे खत्म करने के लिए तैयार करती है।
स्रोत और संदर्भ:
Comparable neutralization of SARS-CoV-2 Delta AY.1 and Delta in individuals sera vaccinated with BBV152
https://www.biorxiv.org/content/10.1101/2021.07.30.454511v1
अस्वीकरण नोट: यह लेख मेडरिक्सिव नामक प्री-प्रिंट पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।