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Coronavirus: भारतीय दवा पर डब्ल्यूएचओ के बाद चीन भी बैकफुट पर, हेल्थ जर्नल लैंसेट ने रिसर्च वापस ली

Fri, 05 Jun 2020 08:34 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 05 Jun 2020 08:34 PM IST
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Hydroxychloroquine Research Update: Controversial Lancet study linking HCQ, deaths in COVID 19 treatment retracted, WHO says Okay
Hydroxychloroquine - फोटो : Amar Ujala

कोरोना के इलाज में मददगार साबित होने वाली भारतीय दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने वाली चीन की स्वास्थ्य पत्रिका लैंसेट बैकफुट पर आ गई है। बीते 22 मई को लैंसेट में प्रकाशित रिसर्च स्टडी में कोरोना मरीजों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा से गंभीर खतरे की बात कही गई थी। जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने भी इसके ट्रायल पर रोक लगाई थी। हालांकि डब्ल्यूएचओ की रोक के बावजूद भारत, ब्राजील और अन्य देश इसका प्रयोग जारी रखे हुए थे। अब, रिसर्च जर्नल लैंसेट को भी इस दवा को लेकर विवादित स्टडी वापस लेनी पड़ी। 

Hydroxychloroquine Research Update: Controversial Lancet study linking HCQ, deaths in COVID 19 treatment retracted, WHO says Okay
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन - फोटो : social media

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण से प्रभावित देशों को भारतीय दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ने बड़ी उम्मीद दिखाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी में कोरोना मरीजों पर यह दवा असरदार साबित हुई है। इसी को देखते हुए न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसकी प्रशंसा कर चुके हैं, बल्कि कई देशों ने कोरोना संकट के दौर में इस दवा को हाथों-हाथ लिया है। भारत मलेरिया और अर्थराइटिस की ऐसी दवाओं का बड़ा उत्पादक देश है और इसने कोरोना संक्रमण काल में कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति की है। 

Hydroxychloroquine Research Update: Controversial Lancet study linking HCQ, deaths in COVID 19 treatment retracted, WHO says Okay
Hydroxychloroquine Tablet - फोटो : Social Media

मेडिकल रिसर्च जर्नल लैंसेट में प्रकाशित रिसर्च पर दुनियाभर से आपत्तियां आईं। करीब  100 से ज्यादा शोधकर्ताओं ने जांच की मांग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, रिसर्च के डेटा इंडिपेंडेंट इवैल्यूएशन के लिए नहीं मिल पाए, इसलिए लैंसेट को यह स्टडी वापस लेनी पड़ी। दुनिया भी मानती है कि कोरोना के इलाज में यह भारतीय दवा बहुत मददगार है। 

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Hydroxychloroquine Research Update: Controversial Lancet study linking HCQ, deaths in COVID 19 treatment retracted, WHO says Okay
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Amar Ujala

कोरोना के इलाज में मददगार इस भारतीय दवा के बारे में लैंसेट ने जो रिपोर्ट छापी, उसको लेकर काफी विवाद हुआ। सोशल मीडिया पर तो इसे चीन की साजिश तक बताया गया। लोगों को आश्चर्य हुआ कि चीन की एक स्टडी के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने इसके ट्रायल पर क्यों रोक लगाई! बहरहाल कुछ ही दिन बाद पत्रिका को बैकफुट पर आना पड़ा और उससे पहले डब्ल्यूएचओ को भी रोक हटानी पड़ी। 

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Hydroxychloroquine Research Update: Controversial Lancet study linking HCQ, deaths in COVID 19 treatment retracted, WHO says Okay
Medicine

इस स्टडी का विश्लेषण करने वाली फर्म सर्जिस्फीयर ने इंडिपेंडेंट इवैल्यूऐशन के लिए  डेटा देने से ही मना कर दिया। इस स्टडी में दावा किया गया था कि कोरोना संक्रमित मरीजों को एचसीक्यू देने से उनकी मौत का जोखिम बढ़ जाता है। दुनियाभर के 100 से ज्यादा शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएचओ और दूसरी संस्थाओं से इस रिपोर्ट की जांच कराने की मांग की थी। लैंसेट ने कहा है कि हम प्राइमरी डेटा सोर्स की गारंटी नहीं ले सकते, इसलिए स्टडी वापस ले रहे हैं।

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