कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने सभी को एक बात स्पष्ट रूप से समझा दिया है- सेहत है संग तो जीत सकते हैं हर जंग। विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य को एक झटके में ठीक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। आयुर्वेद वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं के निवारण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा है। कोरोना के समय में वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में लोगों ने आयुर्वेद को सहारा बनाकर लाभ प्राप्त किया है।
आयुष मंत्रालय संग अमर उजाला की पहल: विशेषज्ञ से जानिए स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद में बताए गए मूलमंत्र
जानिए स्वास्थ्य का असली मतलब
स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए प्रो. संजीव कहते हैं कि सिर्फ बीमारी न होने का मतलब यह नहीं है कि हम स्वस्थ हैं। स्वस्थ उसे माना जाता है जिसका शरीर, मन और सामाजिक सरोकार स्वस्थ हो। आयुर्वेद में इसी तरह की स्वास्थ्य की कल्पना की गई है। हमारे स्वास्थ्य के खराब होने का मुख्य कारण प्रज्ञापराध माना जाता है। प्रज्ञापराध ऐसे कार्यों को कहा जाता है जिन्हें हम जानते हैं कि गलत हैं, फिर भी करते हैं। ऐसी चीजें शरीर को अस्वस्थ कर सकती हैं।
स्वास्थ्य के मूल सिद्धांत
आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के कुछ मूल सिद्धांत हैं जिनका सभी लोगों को पालन करना चाहिए। आयुर्वेद में आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य को स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। आहार में भोजन को स्वस्थ और पौष्टिक रखने, पूरी नींद लेने या नींद के समय के सही होने पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है। भोजन या नींद में किसी प्रकार की कमी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। इसी तरह आयुर्वेद में ब्रह्मचर्य पर भी जोर दिया गया है। ब्रह्मचर्य का मतलब सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक बर्ताव कर स्वास्थ्य को सही रखना होता है।
प्रो. संजीव कहते हैं कोरोना से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लोगों को सिर्फ सावधान रहना चाहिए। कोरोना के संबंध में आयुष मंत्रालय समय-समय पर दिशानिर्देश जारी करता रहा है, इनका पालन करके संक्रमण से आसानी से सुरक्षित रह सकते हैं। माइल्ड कोरोना के लक्षणों के साथ पोस्ट कोविड की समस्याओं को ठीक करने में आयुर्वेद काफी मददगार साबित हो सकता है। कोरोना के लक्षणों के अलावा पोस्ट कोविड को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कई सारी औषधियां हैं जिनसे लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। ।
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