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लत कैसी भी हो, सेहत के लिए इसे नुकसानदायक ही माना जाता है। कुछ आदतों के बारे में तो आप खुलकर बात कर पाते हैं लेकिन कुछ तरह की आदतें ऐसी भी होती हैं, जिनका आपको अंदाजा भी नहीं होता और सामान्यतौर पर लोग इसपर बात करने से भी हिचकिचाते हैं। अश्लील फिल्मों (पोर्न) की भी लत ऐसी ही है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसे लत के रूप में समझ पाना भी लोगों के लिए काफी कठिन होता है। समय के साथ आप इसके इतनी अधीन हो जाते हैं कि इसका असर रोजाना के कामकाज पर भी दिखना शुरू हो जाता है। इंटरनेट के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ लोगों को अश्लील फिल्में देखने की आदत लगना काफी सामान्य है, हां पर इसकी लत को मानसिक रोग विशेषज्ञ सामान्य नहीं मानते हैं।
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (एपीए), अश्लील फिल्मों की लत को नशीली दवाओं और शराब की लत जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकार के रूप नहीं मानता है। हालांकि लंबे समय से इस बारे में चर्चा की जा रही है कि क्या पोर्न की लत को 'कंपल्सिव डिस्ऑर्डर' के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए या नहीं? मानसिक रोग विशेषज्ञों के मुताबिक अश्लील फिल्मों की लत के शिकार हो चुके लोगों को पोर्न देखने के लिए एक अनियंत्रित इच्छा का सामना करना पड़ता है। कई लोगों में यह समस्या बहुत ज्यादा बढ़ सकती है जिससे उनके रोजाना का काम भी प्रभावित हो सकता है।
आइए इस बारे में विस्तार से आगे की स्लाइडों में जानने की कोशिश करते हैं।
सावधान: कहीं आपको भी तो नहीं है अश्लील फिल्में देखने की लत, मनोरोग विशेषज्ञ से जानिए कैसे पाएं छुटकारा?
अश्लील फिल्मों की लत के शिकार होते लोग
अश्लील फिल्मों की लत के बारे में जानने के लिए हमने वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की। डॉ सत्यकांत बताते हैं, अश्लील फिल्में देखने की इच्छा किसी भी उम्र में हो सकती है। किशोरों का अश्लील फिल्मों की तरफ आकर्षित होना काफी सामान्य है, हालांकि हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि यह लत में न बदल जाए। इंटरनेट पर अश्लीलता की बढ़ती पहुंच के कारण बच्चों और किशोरावस्था में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले अश्लील सामग्री पठनीय साधन के रूप में उपलब्ध हुआ करती थी किन्तु अब यह इन्टरनेट के कारण आप से बस एक क्लिक की दूरी पर है। बच्चों में इसकी बढ़ती लत विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इस समय उनका दिमाग विकसित हो रहा होता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाये तो यह आजीवन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एवं व्यक्तित्व में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है।
क्यों हो रहे हैं लोग अश्लील फिल्मों की लत के शिकार?
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत कहते हैं, लोग अश्लील फिल्मों की लत के शिकार क्यों हो रहे हैं, यह परिभाषित करने के लिए कोई सटीक पैमाना नहीं है। इसके कई कारण हो सकते हैं।
संभव है आपने इसे सिर्फ अकेलेपन, ऊब, चिंता या अवसाद से निपटने के लिए देखना शुरू किया होगा, हालांकि धीरे-धीरे हमारा दिमाग इसका इतना आदी हो जाता है कि यह आपकी दिनचर्या का एक हिस्सा बन जाता है। इस तरह की कोई भी आदत आपके लिए मानसिक रूप से समस्याएं पैदा कर सकती है।
डॉ सत्यकांत बताते हैं, बच्चों को सेक्स एजुकेशन न देना भी इस लत का प्रमुख कारण हो सकता है। कुछ लोगों में जैविक कारणों से ब्रेन कैमिकल में परिवर्तन के चलते भी यह समस्या हो सकती है।
डॉ सत्यकांत बताते हैं, आपको पोर्न देखने में आनंद आता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसके लती हो गए है। पोर्न की लत का मतलब, न चाहते हुए भी आपको इसे देखने की इच्छा हो, बिना पोर्न देखे आपको चैन न आए या फिर दिन में किसी समय का निर्धारित हो जाना जिसमें आपको पोर्न देखना ही हो। इसके अलावा पोर्न की लत को पहचानना और इससे छुटकारा पाने की कोशिश करना भी आपके लिए बेहद आवश्यक है।
- पोर्न देखे व्याकुल महसूस होना या सामान्य जीवन के कामकाज जैसे ऑफिस या पढाई के दौरान सबकुछ छोड़कर पोर्न देखना।
- पोर्न देखे बिना अपनी सेक्स लाइफ में संतोष न मिल पाना।
- पोर्नोग्राफ़ी देखने के लिए अपनी अन्य ज़िम्मेदारियों और कार्यों को नज़रअंदाज करना।
- उदासी, चिंता, अनिद्रा जैसी स्थितियों से उबरने के लिए पोर्न को एक माध्यम बना लेना।
माता-पिता कब हो जाएं सतर्क
डॉ सत्यकांत कहते हैं, बच्चों को पोर्न की लत से बचाने में माता-पिता का बड़ा योगदान हो सकता है। बच्चों के मोबाइल और कंप्यूटर की जांच करते रहें। यदि बच्चों के फोन या कंप्यूटर में अश्लील विडियो मिलें, जब आप कमरे में प्रवेश करते हों तो बच्चा घबराकर मोबाइल/कंप्यूटर बंद कर ले या स्क्रीन बदल ले तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। बच्चे का कंप्यूटर/मोबाइल से इन्टरनेट हिस्ट्री का हटा देना, रात में बहुत देर तक ऑनलाइन रहना, सब के सो जाने के बाद ऑनलाइन गतिविधियां शुरू करना इन बातों का संकेत हो सकता है कि आपके बच्चे को पोर्न की लत लग रही है। इस बात से न तो घबराएं ना ही बच्चे को मारें-पीटें। बच्चों की जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इन समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। बच्चों की ऑफलाइन गतिविधियाँ बढ़ाएं, खेलकूद योग-प्राणायाम जैसी गतिविधियों को बच्चों की दिनचर्या में शामिल करें।