पिछले करीब ढाई महीने से दुनिया की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा घरों में कैद है। लॉकडाउन के कारण लोग बस जरूरी सामान खरीदने के लिए कभी-कभार बाहर निकलते हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कोविड-19 महामारी को फैलने से रोका जा सके। लेकिन, घरों में रहने के कुछ ऐसे दुष्प्रभाव हैं जो हमें कोरोना वायरस से मुकाबले में कमजोर बना रहे हैं। इंसान का विकास दिन और रात के 24 घंटों के हिसाब से हुआ है।
Coronavirus Lockdown: लॉकडाउन आपके इम्यून सिस्टम पर क्या असर डाल रहा है?
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बैक्टीरिया और वायरस
हमारे शरीर के अंदर मौजूद सिर्केडियन क्लॉक या शरीर की जैविक घड़ी, सूरज के उजाले और रात के अंधेरे से तालमेल बना कर चलती है। सूरज की किरणों से हमें विटामिन डी मिलता है। ये विटामिन हमारे दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाता है। विटामिन डी हमारे फेफड़ों की रोगों से लड़ने की क्षमता को भी मजबूत करता है।
कोई संक्रमण होने पर, फेफड़ों के अंदरूनी हिस्से की ऊपरी परत से पेप्टाइड निकलते हैं, जो बैक्टीरिया और वायरस का खात्मा करते हैं। इस पेप्टाइड को कैथेलिसिडिन कहते हैं, जो हमारी बी और टी इम्यून सेल को भी मजबूती देता है। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है उन्हें सांस की नली में वायरस का इन्फेक्शन होने की आशंका अधिक होती है।
विटामिन डी की कमी
- वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या विटामिन डी के सप्लीमेंट लेने से कोविड-19 से लड़ने में मदद मिलती है?
- डब्लिन के ट्रिनिटी कॉलेज की रिसर्चर रोज केनी की रिसर्च के मुताबिक, इटली और स्पेन में कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों में विटामिन डी की भारी कमी पायी जाती है।
इन जगहों पर लोग घरों के भीतर रहते हैं। बाहर निकलने पर सनस्क्रीन का प्रयोग करते हैं। इसी कारण से उनमें विटामिन डी की कमी होती है। विटामिन डी के सप्लीमेंट लेने से बेहतर है कि सूरज की रौशनी से इसे हासिल किया जाए। इससे अन्य वायरल इन्फेक्शन से भी लड़ने में मदद मिलती है, जैसे कि इन्फ्लूएंजा या सामान्य सर्दी खांसी।