तनाव को अक्सर सिर्फ मन की परेशानी समझ लिया जाता है, लेकिन इसका असर शरीर पर भी पड़ता है। किसी नकारात्मक विचार, डर, चिंता या मुश्किल परिस्थिति के जवाब में शरीर स्वाभाविक रूप से तनाव की प्रतिक्रिया देता है। थोड़े समय का तनाव होना तो सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहे तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
सेहत की बात: कोर्टिसोल बढ़ा तो क्या होगा? वजन से लेकर शुगर तक पर जानिए क्या होता है असर
लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव मानसिक स्वास्थ्य के साथ शरीर को भी प्रभावित कर सकता है। तनाव के दौरान बढ़ने वाला कोर्टिसोल हार्मोन भूख, खान-पान और ब्लड शुगर पर असर डाल सकता है। इससे वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ सकता है।
तनाव में क्यों बढ़ने लगती है भूख?
तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। यह हार्मोन शरीर के ऊर्जा इस्तेमाल और वसा तथा कार्बोहाइड्रेट के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
- तनाव की स्थिति में कुछ लोगों को ज्यादा भूख लग सकती है। आपको मीठे, नमकीन या ज्यादा फैट वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ सकती है।
- अगर ऐसी चीजों का सेवन बार-बार और जरूरत से ज्यादा किया जाए तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा हो सकती है। समय के साथ ये वजन बढ़ने से हो सकता है।
- यही वजह है कि वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए तनाव को कंट्रोल करना भी जरूरी माना जाता है।
ज्यादा तनाव से शरीर को हो सकती हैं कई परेशानियां
लगातार तनाव का असर केवल वजन तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक तनाव बने रहने पर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
- तनाव ब्लड प्रेशर और हृदय की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम हो सकता है।
- इसके अलावा कुछ लोगों में तनाव के साथ मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं और यौन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं।
- पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या शीघ्रपतन और महिलाओं में यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं देखी जाती हैं।
- तनाव का असर त्वचा और बालों पर भी पड़ सकता है। स्ट्रेस के कारण कुछ लोगों में मुंहासे, सोरायसिस, एक्जिमा और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
तनाव कम करने के लिए क्या करें?
तनाव को संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
- सोशल मीडिया और लगातार निगेटिव कंटेट देखने की आदत को कंट्रोल करना जरूरी है।
- फोन, टीवी और कंप्यूटर की गैर-जरूरी स्क्रीन टाइम को कम करने पर भी ध्यान दें।
- योग और नियमित व्यायाम मन और शरीर दोनों को सक्रिय रखने में मदद करते हैं।
- मेडिटेशन यानी ध्यान का अभ्यास भी तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में सहायक हो सकता है।
- अगर तनाव लंबे समय से बना हुआ है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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