भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन और अमेरिका में कोरोना के दैनिक मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, वहीं भारत में भी हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में यह देश में तीसरी लहर का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कोरोना के तेजी से बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी लोगों को कोरोना से बचाव के नियमों का लगातार पालन करते रहना चाहिए, इसमें कोई भी लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
कोरोना संकट: आइसोलेशन नियमों में सीडीसी ने किए बदलाव, 14 नहीं अब इतने दिन रहना होगा सबसे अलग
आइसोलेशन के नियमों में बदलाव
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने कुछ समय पहले ही आइसोलेशन और क्वारंटाइन की अवधि को 14 दिन से घटाकर 10 कर दिया था। अब इसमें एक बार फिर से बदलाव करते हुए इसे घटाकर 5 दिन कर दिया है। सीडीसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया है, कोविड-19 वाले लोगों को 5 दिनों के लिए खुद को आइसोलेट होना चाहिए। यदि वे एसिम्टोमैटिक हैं या उनके लक्षण ठीक हो रहे है और बुखार नहीं है तो मास्क पहनकर अगले पांच दिनों तक लोगों के आसपास रह सकते हैं।
टीकाकरण वालों के लिए नियम
सीडीसी के नए नियमों के मुताबिक जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है या वैक्सीन की दूसरी खुराक लिए छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, उन्हें 5 दिनों के लिए आइसोलेट होने की आवश्यकता है। इसके बाद गले 5 दिनों तक लिए मास्क का उपयोग करते हुए घर के लोगों को संपर्क में रह सकते हैं।
नियमों में बदलाव के पीछे क्या तर्क है?
आइसोलेशन और क्वारंटाइन की अवधि में किए गए बदलावों को लेकर सीडीसी का कहना है, अध्ययनों से पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस बीमारी के शुरुआती दौर में अधिक फैलता है। संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण के पहले 2-3 दिनों में अन्य लोगों को खतरा अधिक होता है, ऐसे में इन दिनों आइसोलेशन आवश्यक माना जाता है। इस अवधि के बाद सामान्यतौर पर दूसरों को संक्रमित करने की आशंका कम हो जाती है, ऐसे में 5 दिनों से ज्यादा का आइसोलेशन आवश्यक नहीं है। हालांकि जब तक रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए सतर्कता बरतना और मास्क पहनना जरूरी है।
भारत में क्या नियम हैं?
भारत में अभी भी आइसोलेशन और क्वारंटाइन की अवधि 14 दिनों की ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के नियम अपने देश में लागू नहीं किए जा सकते हैं। जिस तरह से देश में ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है, ऐसे में लोगों को विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। आइसोलेशन और क्वारंटाइन के समय को कम करने से गंभीर नुकसान हो सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत की स्थिति में बहुत अंतर है। देश में अभी भी बड़ी आबादी को दूसरी डोज नहीं मिली है ऐसे में मानदंडों में ढील देने से और समस्याएं आ सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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