रंग, उत्साह-उमंग और लजीज खानपान के त्योहार होली की पूरे देश में धूम है। ये त्योहार कई मामलों में खास होता है। गुझिया-ठंडाई और मस्त पकवानों का सभी लोगों को पूरे साल इंतजार रहता है। इसके अलावा एक दूसरे को रंग लगाकर, गले-मिलकर हम आपसी प्रेम व्यक्त करते हैं। पर ध्यान रहें, इन तमाम खुशियों के बीच अपनी सेहत को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
Holi & Asthma: होली के रंग-गुलाल कहीं बढ़ा न दें सांस की दिक्कत, अस्थमा रोगी इन बातों का जरूर रखें ध्यान
होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए ये परेशानी बढ़ाने वाला भी हो सकता है। रंगों में मौजूद केमिकल्स और गुलाल के महीन कण सांस लेने में दिक्कत बढ़ा सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि अस्थमा के मरीज होली खेलते समय सावधानी बरतें।
होली और सांस की समस्याएं
होली के दिनों में सांस के मरीज किस तरह से अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं? इसे समझने के लिए हमने पुणे स्थित एक निजी अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ संजय सहाय से बातचीत की। डॉक्टर बताते हैं, होली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए यह परेशानी बढ़ाने वाला हो सकता है। रंगों में मौजूद केमिकल्स और गुलाल के महीन कण सांस लेने में दिक्कत बढ़ा सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि अस्थमा के मरीज होली खेलते समय सावधानी बरतें।
होली के बाद अक्सर ओपीडी में सांस के मरीजों के मामले बढ़ जाते हैं, इसलिए त्योहार के समय में किसी भी समस्या से बचे रहने के लिए पहले से ही कुछ सावधानियां जरूर बरतें।
क्या है डॉक्टर की सलाह?
डॉ संजय कहते हैं, होलिका दहन के समय से लेकर होली खत्म होने तक सांस के मरीजों को सावधान रहना चाहिए। होलिका दहन के दौरान निकलने वाले धुंआ और गर्मी सांस की दिक्कत बढ़ा सकते हैं।
होली के दिन घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनकर रखना जरूरी है जिसे हवा में मौजूद प्रदूषकों से बचाव किया जा सके। रंगों से भी दूरी बनाएं, चेहरे-नाक के आसपास लगे रंग को तुरंत साफ कर लें। होली के रंग शरीर को डिहाइड्रेट कर देते हैं इसके कारण भी सांस की समस्या बढ़ जाती है। सिंथेटिक रंगों में लेड, मरकरी, सल्फेट और अन्य टॉक्सिक पदार्थ हो सकते हैं जो फेफड़ों के लिए खतरनाक हैं।
कभी भी आपको लगे कि सांस लेने में तकलीफ, खांसी बढ़ गई है तो तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
होली के दौरान सांस के मरीज क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, त्योहार का पूरी तरह से आनंद लेने और सांस की समस्याओं से बचे रहने के लिए हर्बल या प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें। गुलाल और हवा में मौजूद प्रदूषकों से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें। पौष्टिक और स्वस्थ आहार के साथ डिहाइड्रेशन से बचे रहने के लिए दिनभर में खूब पानी पीते रहें। डॉक्टर द्वारा दी गई इनहेलर या अन्य दवाएं हमेशा पास रखें जिससे अस्थमा की दिक्कत बढ़ने न पाए।
इन बातों का रखें ध्यान
- होलिका दहन के धुएं से दूर रहें क्योंकि यह सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है।
- अगर आपको एलर्जी या अस्थमा की समस्या ज्यादा है तो होली खेलने से बचें।
- अत्यधिक दौड़-भाग भी न करें, ज्यादा एक्टिविटी करने से सांस फूल सकती है।
- होली में किसी भी प्रकार के नशे से बचें। धूम्रपान-अल्कोहल आपके लक्षणों को बिगाड़ सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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