फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Heatwave: ज्यादा गर्मी डालती है सीधे दिमाग पर असर, डिप्रेशन और आत्महत्या का खतरा

Thu, 20 Jun 2024 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Jun 2024 05:00 PM IST
विज्ञापन
high temperatures lead to increased depression and suicide rates how to stay safe
गर्मी के दुष्प्रभाव - फोटो : istock

देश के कई राज्य इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में अगले पांच दिनों तक लू की स्थिति जारी रह सकती है। कई हिस्सों में हल्की बारिश और आंधी के कारण तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर आई है, हालांकि ज्यादातर इलाकों में अधिकतम तापमान 43-46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को उच्च तापमान-लू के कारण होने वाली दिक्कतों से बचे रहने के लिए निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। हीटवेव के कारण न सिर्फ हीट स्ट्रोक और रक्तचाप से संबंधित समस्याओं का खतरा रहता है साथ ही ये मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी, चिड़चिड़ापन और अवसाद के लक्षणों और आत्महत्या के मामलों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ही चिंता-तनाव या अवसाद जैसी समस्या रही है उन्हें उच्च तापमान से बचाव करते रहना और भी जरूरी हो जाता है।

high temperatures lead to increased depression and suicide rates how to stay safe
स्ट्रेस की समस्या - फोटो : istock

गर्मियों में बढ़ जाते हैं चिंता-तनाव के मामले

क्या आप भी गर्मी की तपती धूप में बाहर निकलते समय गुस्से या अचानक मूड में बदलाव का अनुभव कर रहे हैं? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि अत्यधिक गर्मी हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, जिससे गुस्सा, हताशा और अवसाद के मामले बढ़ सकते हैं। इतना ही नहीं जिन लोगों को पहले से ही अवसाद और गंभीर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दिक्कतें रही हैं उनमें गर्मी के दिनों में आत्महत्या के मामले भी बढ़ते हुए देखे जाते रहे हैं।

आखिर गर्मी का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर होता है? आइए इस बारे में मनोचिकित्सक से समझते हैं।

high temperatures lead to increased depression and suicide rates how to stay safe
मानसिक स्वास्थ्य विकार - फोटो : istock

उच्च तापमान का मानसिक स्वास्थ्य पर असर

भोपाल स्थित एक अस्पताल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, जब हमारा शरीर उच्च तापमान के संपर्क में आता है, तो वह पसीने का उत्पादन करके और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके स्वयं को ठंडा करने की कोशिश करता है। हालांकि जब आप लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहते हैं तो यह मस्तिष्क के रसायनों जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है। ये स्थिति हमारे मूड को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने, चिंता-तनाव जैसे विकारों के मामले काफी बढ़ जाते हैं।

इसके अलावा गर्मी के कारण थायराइड हार्मोन का उत्पादन को प्रभावित हो सकता है, जिससे थकान, अवसाद और स्पष्ट रूप से सोचने में समस्या हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
high temperatures lead to increased depression and suicide rates how to stay safe
गर्मी के जोखिम - फोटो : istock

गर्मियों में बढ़ जाते हैं आत्महत्या के मामले

डॉ सत्यकांत बताते हैं, दुनियाभर में अधिक तापमान वाले दिनों में आत्महत्या के मामले भी अधिक रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। यूरोपीय देशों में भी बढ़ती गर्मी और आत्महत्याओं के बीच संबंध पाया गया है। 

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वेबसाइट द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि उच्च तापमान, आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों को बढ़ाने वाला हो सकता है। औसत मासिक तापमान में हर 1°C की वृद्धि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मौतों में 2.2% की बढ़ोतरी का कारण बन सकती है। सेरोटोनिन की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लक्षण बिगड़ने लगते हैं जिसके कारण इस तरह की गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

विज्ञापन
high temperatures lead to increased depression and suicide rates how to stay safe
नियमित व्यायाम की बनाएं आदत - फोटो : istock

गर्मियों में इन बातों का रखें ध्यान

डॉ सत्यकांत बताते हैं, गर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का एक कारण नींद से संबंधित समस्या भी मानी जाती है। जोखिमों को कम करने के लिए नींद को प्राथमिकता दें। सुनिश्चित करें कि आपको पर्याप्त आरामदायक नींद मिले। नींद के शेड्यूल को नियमित करने और रात में 6-8 घंटे निर्बाध नींद प्राप्त करने से आपके मूड पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि करें। व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है जो आपके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है। हल्का व्यायाम जैसे वॉकिंग या तैरकी भी फायदेमंद हो सकती है।

अगर आपको स्ट्रेस के लक्षण बढ़े हुए नजर आते हैं तो इस बारे में किसी मनोचिकित्सक की सलाह जरूर ले लें। 



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed