त्योहारों के इस सीजन में हर तरफ चहल-पहल और धूम देखी जा रही है। डीजे-लाइउडस्पीकर की आवाज चारों तरफ गूंज रही है, पर क्या आपने कभी सोचा कि बहुत तेज आवाज में बजने वाले डीजे जानलेवा भी हो सकते हैं?
Health Alert: डीजे की तेज आवाज ले सकती है आपकी जान, हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज का खतरा; बरतें सावधानी
- क्या आपने कभी सोचा कि बहुत तेज आवाज में बजने वाले डीजे जानलेवा भी हो सकते हैं?
- डीजे की तेज आवाज से मौत के हर साल मामले सामने आते रहे हैं। आइए जानते हैं तेज आवाज का हमारी सेहत पर किस तरह से असर होता है?
ये कोई पहला मामला नहीं है, जहां डीजे की तेज आवाज जानलेवा साबित हुई है। ऐसे मामलों की भरमार है।
- पिछले साल सितंबर में रायपुर में 40 वर्षीय एक व्यक्ति को तेज आवाज में बज रहे डीजे के कारण ब्रेन हेमरेज हो गया था। डॉक्टर इस असामान्य मामले को देखकर दंग रह गए थे, क्योंकि उस व्यक्ति को उच्च रक्तचाप, अन्य बीमारियों का कोई इतिहास नहीं था। तेज आवाज के कारण अचानक मरीज को चक्कर आने लगा और वह बेहोश हो गया। डॉक्टरों नें बाद में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि की।
- इसके अगले ही महीने मध्यप्रदेश में डीजे पर एक कार्यक्रम के दौरान डांस कर रहे 13 वर्षीय किशोर की मौत हो गई थी। डॉक्टर्स ने पाया था कि तेज आवाज ने हार्ट अटैक की स्थिति को ट्रिगर कर दिया था।
- सितंबर 2023 में सांगली में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हाई डेसिबल ध्वनि के संपर्क में आने से दो लोगों की मौत हो गई थी।
तेज आवाज वाले डीजे क्यों इतने खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेज आवाज वाला डीजे या बहुत हाई डेसिबल ध्वनि का संगीत केवल कानों पर असर नहीं डालता, बल्कि यह सीधे दिल की धड़कनों को भी प्रभावित करता है। हमारे शरीर में दिल की धड़कनें नर्वस सिस्टम (सिम्पैथेटिक और पैरासिम्पैथेटिक सिस्टम) से नियंत्रित होती हैं। जब तेज आवाज अचानक कानों में पड़ती है तो शरीर स्ट्रेस रिस्पॉन्स एक्टिवेट कर देता है। इसका मतलब है कि शरीर इसे एक खतरे का संकेत मानता है और एड्रेनालिन हार्मोन तेजी से रिलीज करता है।
इस कारण दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है वहीं लगातार ऐसी स्थिति रहने पर एरिथमिया यानी अनियमित धड़कन का खतरा बढ़ जाता है। ये सभी स्थितियां हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं।
85 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज खतरनाक
शोध बताते हैं कि 85 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ जाता है। डीजे का साउंड लेवल अक्सर 100-120 डेसिबल तक होता है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है। इसका सीधा असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ता है जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक का इतिहास या डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं।
तेज आवाज की वजह से नसें सिकुड़ सकती हैं, जिससे दिल पर अचानक दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक का खतरा दोगुना तक बढ़ सकता है।
फट सकती है दिमाग की नस
अध्ययनों से पता चलता है कि हाई-डेसिबल वाली आवाज दिल के साथ मस्तिष्क के लिए भी खतरनाक है। ये तनाव प्रतिक्रिया उत्पन्न करके, रक्तचाप बढ़ा देती है। इससे धमनियों के सख्त होने और उनके फटने का खतरा हो सकता है।
भारत में दर्ज 2024 के एक मामले से पता चलता है कि अत्यधिक तेज आवाज वाले डीजे के कारण एक व्यक्ति को ब्रेन में रक्तस्राव हुआ जिसे पहले कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। शोध यह भी दर्शाते हैं कि तीव्र आवाज ब्रेन हेमरेज के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
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स्रोत
Cardiovascular effects of environmental noise exposure
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