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सावधान: कहीं आपको भी तो नहीं है हाई ब्लड शुगर की समस्या? इन अंगों पर पड़ सकता है बुरा असर

Mon, 06 Sep 2021 04:17 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 06 Sep 2021 04:17 PM IST
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high blood sugar levels may damage many parts of body
डायबिटीज के कारण हो सकती हैं कई गंभीर समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

Medically Reviewed by-


डा. अल्तमश शेख
(एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबेटोलॉजिस्ट)
मुंबई


मधुमेह दुनियाभर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में 77 मिलियन (7.7 करोड़) से अधिक लोग इस गंभीर रोग के शिकार हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि साल 2045 तक यह आंकड़ा बढ़कर 134 मिलियन (13.4 करोड़) से अधिक का हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मधुमेह की समस्या लोगों में मुख्यरूप से दो प्रकार की होती है- टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज। हाल के वर्षों में गर्भकालीन डायबिटीज की समस्या भी काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है। ब्लड शुगर की इस गंभीर समस्या से बचाव के लिए लोग तमाम प्रकार के उपाय और दवाइयों का प्रयोग करते हैं, हालांकि यह समस्या आमतौर पर पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य की समस्या होने के साथ शरीर के कई अन्य अंगों के लिए गंभीर क्षति का कारण भी बन सकती है। असामान्य रूप से ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाने की समस्या को हाइपरग्लेसेमिया के रूप में जाना जाता है, यह स्थिति शरीर के लिए बेहद गंभीर हो सकती है। हाइपरग्लेसेमिया कई अंगों को क्षति पहुंचा सकती है, आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

high blood sugar levels may damage many parts of body
आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है डायबिटीज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

आंखों की हो सकती है परेशानी
हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति वाले लोगों में दृष्टि से संबंधी विकार होने का खतरा सबसे अधिक होता है। रक्त शर्करा का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाने पर रोगियों को धुंधली दृष्टि, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और आंखों से संबंधित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इन परेशानियों से बचे रहने के लिए डायबिटीज के रोगियों को संतुलित और पौष्टिक आहार के साथ नियमित रूप से व्यायाम करने की सलाह दी जाती है।

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डायबिटीज में पैरों को हो सकती है दिक्कतें (सांकेतिक) - फोटो : pixels

डायबिटिक फुट की समस्या
मधुमेह के रोगियों में ब्लड शुगर की बढ़ी हुई मात्रा पैर से संबंधित जटिलताओं को बढ़ा सकती है। सामान्य तौर पर रोगियों को डायबिटिक फुट की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में पैर की उंगलियों में कालापन और घाव हो सकता है। अनुपचारित रहने की स्थिति में यह समस्या बढ़ते हुए पूरे पैर में फैल सकती है। इस स्थिति में रोगियों को ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के प्रयास करने चाहिए।

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घाव भरने में लग सकता है समय (सांकेतिक) - फोटो : iStock

घावों का जल्दी न ठीक होना
मधुमेह के रोगियों में घावों के समय पर ठीक न होने की समस्या सबसे आम रहती है, हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति में जटिलताएं और अधिक हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरग्लेसेमिया, प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित करती है, जिसके कारण घावों को ठीक करने के लिए शरीर की प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है। ब्लड शुगर की स्थिति बहुत अधिक बढ़ जाने पर घावों को ठीक होने में कई बार महीनों लग सकते हैं।

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कोरोना जैसे संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा - फोटो : pixabay

संक्रमण का बढ़ जाता है खतरा 
हाइपरग्लेसेमिया की स्थिति के कारण रोगियों में संक्रमण होने का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले काफी अधिक हो जाता है। ऐसे रोगियों में पेशाब के संक्रमण का खतरा अधिक होता है जो किडनी की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। हाइपरग्लेसेमिया के कारण होने वाले संक्रमणों के परिणामस्वरूप शरीर में एक स्ट्रेस रिस्पांस हो सकती है जिसके कारण कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन हार्मोन स्राव बढ़ जाता है। यह हार्मोन इंसुलिन रेजिस्टेंस होते हैं जिसके कारण शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। हाइपरग्लेसेमिया के कारण कोरोना का खतरा भी बढ़ जाता है।


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नोट: यह लेख डा. अल्तमश शेख (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट एंड डायबेटोलॉजिस्ट, मुंबई) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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