हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। कुछ दशकों पहले तक हृदय रोगों को बढ़ती उम्र के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब काफी कम उम्र, यहां तक कि युवा आबादी भी हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रही है।
Heart Attack: कहीं आपको भी तो नहीं है हार्ट अटैक का खतरा? इन टेस्ट की मदद से कर सकते हैं पता
हृदय रोगों की बढ़ती समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय के साथ कई गड़बड़ आदतों ने हमें घेर लिया है जो हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रही है। ज्यादातर लोग सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के शिकार हैं, दिन का अधिकतर समय एक स्थान पर बैठे-बैठे बीत जाता है। इसके अलावा जंक-प्रोसेस्ड फूड्स के कारण कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ रही है जिससे हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो रहा है।
कम उम्र से ही अगर हृदय की सेहत पर ध्यान न दिया जाए तो इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि किन टेस्ट के माध्यम से हृदय रोगों के खतरे को पता लगाया जा सकता है। इन सभी टेस्ट के लिए एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
कोलेस्ट्रॉल की कराएं जांच
कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए ब्लड का सैंपल लिया जाता है जिसके आधार पर आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल और फैट की मात्रा का पता लगाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल आपके रक्त में पाया जाने वाला एक मोम युक्त पदार्थ है। स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए वैसे तो इसकी आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी अधिकता गंभीर हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकती है।
ब्लड में 200 मिलीग्राम/डीएल से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को सामान्य माना जाता है। 240 मिलीग्राम/डीएल या उससे ऊपर की मात्रा हानिकारक हो सकती है।
ईसीजी की जांच
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) टेस्ट हृदय में विद्युत संकेतों को रिकॉर्ड करती है। इस टेस्ट की मदद से ये जाना जा सकता है कि दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है, दिल की धड़कन की लय (स्थिर या अनियमित) कैसे है और विद्युत आवेग किस प्रकार के हैं?
ईसीजी में परिवर्तन हृदय संबंधी कई स्थितियों का संकेत हो सकती है। हार्ट अटैक जैसी स्थितियां का पता लगाने के लिए भी इस टेस्ट की मदद ली जाती है।
सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट
शरीर में कहीं इंफ्लामेशन की दिक्कत तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सीआरपी का स्तर बढ़ने का मतलब यह हो सकता है कि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जो सूजन का कारण बन रही है। एचएस-सीआरपी परीक्षण कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिमों को जानने में भी मदद करती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज में हृदय की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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