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World Heart Day 2023: हार्ट अटैक आने पर तुरंत अपनाएं यह उपाय, बच सकती है मरीज की जान

Wed, 27 Sep 2023 10:14 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 27 Sep 2023 10:14 AM IST
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World Heart Day 2023: Heart Attack First Aid CPR after Heart Attack Save Life Know all About CPR Steps
दिल का दौरा पड़ने के तुरंत बाद क्या करें - फोटो : istock

World Heart Day 2023: इन दिनों ह्रदय घात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।कम उम्र में लोगों में हृदयाघात का खतरा बढ़ना गंभीर समस्या बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में 40 साल से कम आयु के लोगों की मौत हार्ट अटैक आने से हो चुकी है। अधिकतर मामलों में जिम और फिटनेस में सक्रिय लोगों को हार्ट अटैक आया है। विशेषज्ञ हार्ट अटैक की समस्या से बचाव से लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। ऐसा नहीं कि हृदयाघात आने पर तुरंत व्यक्ति की मौत हो जाती है। सही समय पर इलाज न मिल पाने के कारण रोगी जानलेवा स्थिति में पहुंच जाता है। इसलिए हृदयाघात से बचाव के उपाय जानने के साथ ही हार्ट अटैक आने पर तुरंत किए जाने वाले उपचार के बारे में पता होना चाहिए, ताकि समय रहते रोगी को बचाया जा सके।



इसका एक नमूना मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देखने को मिला, जब  सड़क पर चलते एक व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक आ गया। ह्रदय घात होने पर व्यक्ति सड़क पर गिर पड़ा, तभी एक महिला सब इंस्पेक्टर ने तुरंत मौके पर पहुंचकर व्यक्ति की जान बचा ली। महिला सब इंस्पेक्टर ने रोगी को तत्काल सीपीआर दिया। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे उचित इलाज मिला। वहीं एक मामला मैक्सिको का है, जहां एंड्रेस मोरेनो नाम के एक व्यक्ति का है, जिनका वजन बहुत अधिक था। ओवरवेट होने के कारण उनकी पत्नी ने एंड्रेस को छोड़ दिया था। बड़े हुए वजन और मानसिक तनाव की वजह से एंड्रेस मोरेनो को दिल का दौरा पड़ा और मौत हो गई।

सीपीआर हार्ट अटैक के बाद रोगी की जान बचाने के लिए एक कारगर उपाय है। कई मामलों में पाया गया कि हार्ट अटैक के बाद सीपीआर देकर रोगी की जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं ग्वालियर की सब इंस्पेक्टर ने स्पीकर के जरिए कैसे हार्ट अटैक आने पर मरीज की जान बचाई? सीपीआर कैसे दिया जा सकता है और यह कितना कारगर इलाज साबित हो सकती है?

World Heart Day 2023: Heart Attack First Aid CPR after Heart Attack Save Life Know all About CPR Steps
हार्ट अटैक के बाद सीपीआर देने के लाभ - फोटो : istock

क्या है सीपीआर?

सीपीआर का मतलब कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह एक जीवन रक्षक तकनीक है, जो हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में कारगर है। जब रोगी को दिल का दौरा पड़ता है या पानी में डूबने के बाद सांस नहीं आती है, तो इस तरह की स्थिति में सीपीआर दिया जाता है। सीपीआर के जरिए रोगी के शरीर में रक्त और ऑक्सीजन का संचार किया जा सकता है।

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सीपीआर देने के तरीके के बारे में जानिए - फोटो : istock

कैसे देते हैं सीपीआर?

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि सही तकनीक से सीपीआर देने पर रोगी की जान बचाई जा सकती है। हार्ट अटैक के बाद प्रारंभिक स्तर पर इलाज का यह आवश्यक उपाय है। इससे हार्ट अटैक के कारण होने वाली मौत के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि सीपीआर देने की एक विशेष तकनीक है। दिल का दौरा पड़ने पर 100-120/ मिनट की दर से छाती को दबाया जाता है। इस प्रक्रिया को करने के लिए दोनों हाथों को इस प्रकार से जोड़ें कि हथेली का निचला हिस्सा छाती पर आए। फिर हथेली को छाती के केंद्र के निचले आधे हिस्से पर रखकर दबाएं। छाती को 5 सेमी तक संकुचित करें। ध्यान रखें कि बहुत तेजी से दबाव नहीं डालना है।

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सीपीआर का फायदा - फोटो : istock

सीपीआर देने से क्या होता है?

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि सीपीआर की प्रक्रिया के जरिए कृत्रिम विधि से ह्रदय को रक्त पंप करने में मदद मिलती है और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचने लगता है। दरअसल, दिल का दौरा पड़ने से ह्रदय की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। रक्त और ऑक्सीजन का संचार बाधित हो जाता है। सीपीआर तकनीक के जरिए छाती को दबाकर पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

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सीपीआर के बाद क्या करें ? - फोटो : istock

सीपीआर के तुरंत बाद क्या करें?

दिल का दौरा पड़ने जैसी आपात स्थिति के बाद सीपीआर दिया है तो इसके तुरंत बाद विशेषज्ञ से संपर्क करना बहुत आवश्यक हो जाता है। सीपीआर ह्रदय घात का इलाज नहीं है, बल्कि कृत्रिम तौर पर शरीर में रक्त के संचार को बनाए रखने का एक आपात उपाय है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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