डॉक्टर आईएन वाजपई
न्यूरो सर्जन
अनुभव- 45 वर्ष
Medically Reviewed by Dr. I. N. Vajpayee
आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में कई तरह की ऐसी बीमारियां हैं, जो इंसान के आसपास रहती हैं और कब किसे अपना शिकार बना लें कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, कोरोना काल ने तो हर किसी को अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले से काफी ज्यादा चिंतित कर दिया है। इसी कड़ी में एक बीमारी है रूमेटाइड अर्थराइटिस। जितना अजीब इसका नाम है, उससे कहीं ज्यादा या दिक्कतें व्यक्ति को देती है। तो चलिए जानते हैं इस बीमारी के बारे में और इसके लक्षण से लेकर इलाज तक के बारे में।
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दरअसल, रूमेटाइड अर्थराइटिस यानी गठिया के मरीजों को घुटनों, पीठ, कलाई, एड़ियों और गर्दन के जोड़ों में दर्द होता है। वहीं, इस बीमारी की चपेट में खासकर बुजुर्ग आते हैं। हालांकि, अपनी खराब लाइफस्टाइल के कारण अब इस बीमारी का शिकार युवा भी हो रहे हैं। वहीं, अगर इस बीमारी को हल्के में लिया जाए और इसका समय रहते इलाज न कराया जाए तो ये जोड़ों और हड्डियों के अलावा आंखों, त्वचा और हमारे फेफड़ों जैसे कई अंगों को प्रभावित कर सकती है।
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इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जहां एक तरफ हमारा इम्यून सिस्टम हमारे शरीर को किसी भी वायरस और बैक्टीरिया के इंफेक्शन से बचाता है, तो वहीं दूसरी तरफ एक ऑटोइम्यून बीमारी में इम्यून सिस्टम शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसे में शरीर के अंगों में काफी ज्यादा जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा होने लगती है। लंबे समय तक सूजन रहने की वजह से जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
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ये हैं लक्षण:-
-कमजोरी होना
-हल्का बुखार आना
-भूख न लगना
-मुंह और आंखों का सूखना
-शरीर में गांठ बनना
-सुबह-सुबह शरीर के किसी अंग में लंबे समय तक अकड़न महसूस करना। हालांकि, ये अकड़न शरीर की मूवमेंट के अनुसार ठीक हो जाती है।
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किन्हें ज्यादा खतरा?
- कई अध्ययन बताते हैं कि रूमेटाइड अर्थराइटिस से सबसे ज्यादा खतरा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को है। 30 से 50 साल की उम्र में लगभग 75 फीसदी महिलाएं इससे ग्रसित पाई गई हैं। हालांकि, रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।