अंशु सिंह
दिल्ली की रहने वाली 30 वर्षीय ऋचा हमेशा अपने दो साल के बेटे आर्यन के लिए परेशान रहती हैं। ऋचा को नौकरी पर जाना होता है और आर्यन का ध्यान उसके दादा-दादी रखते हैं। वह इतना चंचल है कि खेल-खेल में अक्सर कुछ ऐसा कर बैठता है, जिससे चोटिल हो जाता है या दादा-दादी को कर देता है। कई बार तो फर्श पर इतना जोर से गिरता है कि सिर में सूजन तक आ जाती है। ऋचा ने जब यह परेशानी अपनी दोस्त डॉ. हर्षिता को बताई तो उन्होंने कहा, “वैसे तो बच्चों के साथ घटने वाली यह मामूली घटना है, लेकिन बार-बार सिर पर चोट लगना मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में अगर बच्चा सिर या गर्दन में दर्द की शिकायत करता है तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि छोटी-छोटी परेशानियों को नजरअंदाज करना स्थिति को गंभीर बना सकता है।”
यह बात भी सच है कि घर ही वह स्थान है, जहां हम खुद को सबसे सुरक्षित पाते हैं। मगर इसी स्थान पर परिवार के सदस्य किसी न किसी छोटी-मोटी दुर्घटना का शिकार हो ही जाते हैं। कभी कोई फिसल जाता है, जिस कारण चोट लग जाती है या मोच आ जाती है। कभी रसोई में काम करते वक्त हाथ कट या जल जाता है। कई बार पालतू पशु और कीड़े-मकौड़े जख्म दे जाते हैं। तब आप इन जख्मों या खरोंचों पर घरेलू नुस्खे आजमाती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि आपके उपाय लाभकारी सिद्ध हों। ऐसे में आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसलिए जागरूक रहना और सावधानी बरतना जरूरी है।
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कटने और जलने को हल्के में न लें
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कटने और जलने को हल्के में न लें
रसोई वह स्थान है, जहां पाक कलाओं को लेकर तमाम तरह के प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन यहीं हल्की-फुल्की चोट लगने की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। अमूमन, रसोई में प्राथमिक रूप से फल-सब्जी काटने, भोजन पकाने, चाय-कॉफी बनाने, मसाले पीसने और साफ-सफाई से लेकर अन्य कई तरह के काम किए जाते हैं। कई बार ऐसा करते हुए कभी उंगली कट जाती है, कभी गरम पानी या तेल हाथों पर गिर जाता है तो कभी इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंस चलाते हुए इलेक्ट्रिक शॉक लग जाता है। आप अक्सर इनकी खास परवाह नहीं करती हैं और नजरअंदाज कर देती हैं। वह अक्सर चोट लगी जगह पर जलन को रोकने के लिए सरसों तेल या ठंडे पानी में हाथ को डूबोकर, कोई स्प्रे छिड़ककर, बर्न ऑइंटमेंट या एलोवेरा जेल लगाकर काम चला लेती हैं।
इसके अलावा चोट पर अधिक से अधिक बैंडेड या एंटीबायोटिक मरहम लगा लेती हैं। लेकिन कुछ मामलों में इतना काफी नहीं होता, जैसे कि यदि गहराई तक त्वचा जल गई है तो संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। इसी प्रकार कुछ कट गहरे होते हैं और उनसे रक्तस्राव बंद नहीं होता तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है, क्योंकि वही इसका सही इलाज बता सकते हैं।
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सिर में लगी चोट
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सिर की चोट हो सकती गंभीर
छोटे बच्चों को आप कितना भी संभाल लें, नटखटपन और शरारतों की वजह से अक्सर उन्हें चोट लग ही जाती है। दौड़ने, खेलने-कूदने, कुर्सी या बिस्तर से उतरते समय थोड़ा-सा संतुलन बिगड़ते ही उन्हें सिर पर या हाथ-पैर में चोट लग जाती है। इस मौके पर होम किट या घरेलू नुस्खों की मदद से मरहम-पट्टी करना जरूरी है। अक्सर आप खरोंचों पर खास ध्यान नहीं देतीं, जबकि उनमें ही संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है।
डॉक्टर कहते हैं कि खरोंच लग जाए तो सबसे पहले उस स्थान को साफ पानी, डिटॉल या मेडिकेटेड वाइप से क्लीन करके उस पर कोई ऑइंटमेंट लगाएं। यदि आपको वह स्थान नीला दिखाई दे या उसमें सूजन नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें, क्योंकि यह किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है।
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बुजुर्गों के प्रति सतर्कता
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बुजुर्गों के प्रति सतर्कता
बच्चों के अलावा आपको परिवारों के बुजुर्गों का भी खास ख्याल रखना होता है। बुजुर्गों की बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर और आंखों की रोशनी कम होने लगती है। कई बार उनके लिए शरीर पर संतुलन बनाए रखना भी मुश्किल होता है। इससे उनके गिरने या चोटिल होने का खतरा हमेशा बना रहता है, खासकर डिमेंशिया और पार्किंसन के शिकार बुजुर्गों के बाथरूम में गिरने की अनेक घटनाएं घटित होती हैं। यह जरूरी नहीं कि हर चोट गंभीर हो और डॉक्टर को दिखाने की जरूरत पड़े, लेकिन अगर सिर पर कहीं चोट लगी हो और बुजुर्ग को नींद या चक्कर आने लगें, उल्टियां शुरू हो जाएं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा चोट लगने से अगर हाथ या पैर उठाने में तकलीफ हो रही हो, तब भी जांच करानी चाहिए।
बिजली के उपकरणों से सावधानी
कहावत है, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।’ अनजाने में होने वाली लापरवाहियां कब घातक हो जाती हैं, इसका आभास तक नहीं होता है। आधुनिक घरों में इलेक्ट्रिकल एप्लायंसेस का उपयोग काफी बढ़ गया है। रसोई से लेकर तमाम स्थानों पर बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन मोबाइल चार्ज करने, गीजर या इलेक्ट्रिक हीटर चलाने के बाद आप उनको कई बार बंद करना भूल जाती हैं। इससे कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है।
छोटा बच्चा अगर प्लग में लगे चार्जर के तार को मुंह में डालता या चबाता है तो उसे करंट लग सकता है। बच्चा ही नहीं, करंट लगने से किसी को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए अच्छा होगा कि बिजली के तार को कभी खुला न छोड़ें। मोबाइल चार्ज या कोई भी अप्लायंस इस्तेमाल करने के बाद स्विच ऑफ कर दें। फिर भी अगर किसी को शॉक लग जाए तो उसे स्पर्श न करें। कार्डबोर्ड, प्लास्टिक या लकड़ी से बनी चीजों से उसे इलेक्ट्रिक सोर्स से दूर करने का प्रयास करें।
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खून रोकने के प्राथमिक उपाय
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खून रोकने के प्राथमिक उपाय
- किसी भी गंदगी को हटाने के लिए कट को तुरंत ठंडे बहते पानी से धोएं। हल्के साबुन का उपयोग किया जा सकता है।
- रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए साफ कपड़े से दबाव डालें। रक्तस्राव बंद होने तक दबाव बनाए रखें।
- संक्रमण रोकने के लिए घाव पर एंटीसेप्टिक घोल या मेडिकेटेड वाइप से साफ करके घाव को खुला छोड़ दें। इससे घाव जल्दी भरता है।
अगर झुलस जाए हाथ
- जलने पर कम से कम 10-15 मिनट के लिए जले हुए हिस्से पर तुरंत ठंडा पानी डालें, लेकिन सीधे बर्फ का उपयोग न करें।
- पहली डिग्री के जलने से त्वचा की केवल ऊपरी परत प्रभावित होती है, जिसे तुरंत ठंडा करके ठीक किया जा सकता है।
- ठंडा होने के बाद जले हुए हिस्से की नॉन-स्टिक ड्रेसिंग कर दें, ताकि संक्रमण को रोका जा सके। आप रूई या चिपकने वाली पट्टियों के उपयोग से बचें।