Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
कैल्शियम हमारे शरीर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला खनिज है और शरीर में इसका होना भी बहुत ही जरूरी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर के कुल कैल्शियम का 90 फीसदी हिस्सा हड्डियों और दांतों में होता है, जबकि बाकी का 10 फीसदी हिस्सा खून, शरीर के तरल पदार्थ, नसों और मांसपेशियों की कोशिकाओं और ऊतकों आदि में मौजूद जाता है। खासकर हड्डियों की मजबूती के लिए तो कैल्शियम बहुत ही जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का सेवन नहीं करता है या शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है तो ऐसी स्थिति में शरीर ठीक से काम नहीं कर पाता है, यानी शरीर कमजोर हो सकता है। इसलिए आहार के माध्यम से इसकी कमी को पूरा करना जरूरी होता है। आइए जानते हैं कि डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, जिससे शरीर में कैल्शियम की कमी न हो।
सावधान: आपको कमजोर बना सकती है कैल्शियम की कमी, डाइट में इन चीजों को करें शामिल
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कैल्शियम की कमी के नुकसान क्या हैं?
- शरीर में कैल्शियम की कमी से हड्डियां और दांत कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। डिप्रेशन, अनिद्रा, डिमेंशिया, मांसपेशियों में ऐंठन और मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द की समस्या भी कैल्शियम की कमी के कारण हो सकती है।
कैल्शियम के फायदे क्या हैं?
- कैल्शियम का सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि यह हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है और मांसपेशियों के संकुचन को कम करता है। इसके अलावा यह हृदय की धड़कन को भी नियंत्रित करने और उच्च रक्तचाप को भी कम करने में मदद करता है।
कैल्शियम के स्रोत क्या हैं?
- सोयाबीन, सोया मिल्क, टोफू
- बादाम
- संतरा
- पालक, ब्रोकली, टमाटर, गाजर
- दूध और दूध से बने उत्पाद
- पत्तेदार सब्जियां
कैल्शियम की अधिकता से नुकसान
- शरीर में कैल्शियम की अधिकता नुकसानदायक भी हो सकती है। कैल्शियम की बहुत अधिक मात्रा लेना किडनी में पथरी और दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। हालांकि आमतौर पर भोजन से इस तरह के नुकसान की संभावना लगभग ना के बराबर होती है, लेकिन उच्च मात्रा में कैल्शियम की दवा लेने से ये नुकसान हो सकते हैं। इसलिए कैल्शियम की दवा किसी भी रूप में बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।