Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
पिछले कुछ दिनों से कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों में हो रहे फंगल संक्रमण को लेकर खूब चर्चा हो रही है। पहले ब्लैक फंगस से संक्रमण के मामले सामने आए थे, उसके बाद व्हाइट और फिर येलो फंगस के मामले सामने आए। अब ग्रीन फंगस के भी मामले सामने आने लगे हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर में एक शख्स ग्रीन फंगस से संक्रमित मिला है। बताया जा रहा है कि कोरोना से ठीक होने के बाद उस शख्स को घर भेज दिया गया था, लेकिन फिर पोस्ट कोविड लक्षणों की वजह से उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उसके ग्रीन फंगस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के फेफड़ों में 90 फीसदी संक्रमण हो गया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए मुंबई भेजा गया। फिलहाल हिंदुजा अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा है। आइए जानते हैं कि अब ये ग्रीन फंगस कौन सी नई बला है और इसके लक्षण क्या हो सकते हैं?
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कोरोना मरीजों में अब ग्रीन फंगस का खतरा: ऐसे लोग रहें सावधान, इन पांच लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Wed, 16 Jun 2021 01:43 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 16 Jun 2021 01:43 PM IST
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कोरोना मरीजों में ग्रीन फंगस का खतरा
- फोटो : iStock
प्रतीकात्मक तस्वीर
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विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपरजिलस फंगस को ही सामान्य भाषा में ग्रीन फंगस कहा जाता है। एसपरजिलस कई तरह की होती है। ये शरीर पर काली, नीली हरी, पीली हरी और भूरे रंग की पाई जाती है। एसपरजिलस फंगल संक्रमण भी फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। इसमें फेफड़ों में मवाद भर जाता है, जो इसे खतरनाक बना देता है। दरअसल, यह फंगस फेफड़ों को काफी तेजी से संक्रमित करता है।
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ग्रीन फंगस का खतरा किसे ज्यादा?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों को पहले से कोई एलर्जी होती है, ग्रीन फंगस से संक्रमित होने का खतरा उनमें ज्यादा होता है। इसमें भी अगर संक्रमित होने वाले मरीज को निमोनिया हो जाए या फंगल बॉल बन जाए तो ये खतरनाक और जानलेवा हो सकता है।
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ग्रीन फंगस के लक्षण क्या हैं?
- घरघराहट
- सांस लेने में कठिनाई
- बुखार (दुर्लभ मामलों में)
- अगर संक्रमण गंभीर है, तो मरीज को सीने में दर्द या खांसी के साथ खून भी आ सकता है
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विशेषज्ञ कहते हैं कि वैसे तो सभी तरह की फंगस में एक बात समान पाई जाती है और वो ये है कि अगर प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है, तो फंगल संक्रमण शरीर पर हमला कर देता है। स्वस्थ और अच्छी इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगल संक्रमण नहीं होता।