अब तक हम सभी सर्दी-खांसी और बुखार जैसी दिक्कतों के लिए उपयोग की जाने वाली ओवर-द-काउंटर दवाएं लेने मेडिकल स्टोर जाते हैं। पर अब इन दवाओं को आपके नजदीकी जनरल स्टोर पर उपलब्ध कराने की नीति पर विचार किया जा रहा है। अमेरिका जैसा देशों में पहले से ही जनरल स्टोर पर खांसी और सर्दी की दवाएं मिलती रही हैं। विशेषज्ञों की टीम का मानना है कि भारत में भी इस तरह की सुविधा होनी चाहिए।
OTC Medicine: जनरल स्टोर पर मिलेंगी जुकाम-बुखार की दवाएं? डॉक्टरों से जानिए ये कितना सही-कितना गलत
ओटीसी दवाओं को लेकर समिति का सुझाव
ओवर-द-काउंटर उन दवाओं को कहा जाता है जिन्हें डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना बेचने की अनुमति होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस तरह की दवाओं के उपयोग को लेकर उनका वर्गीकरण किया हुआ है। इसी तर्ज पर अब भारत में भी इन दवाओं को जनरल स्टोर पर उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।
इससे पहले फरवरी में, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक अतुल गोयल ने भारत की ओटीसी दवा नीति तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया।
ग्रामीण इलाकों में दवाओं की आसान होगी पहुंच
समिति के सदस्यों ने हाल ही में काउंटर पर बेची जा सकने वाली दवाओं की पहली सूची सौंपी है, जिसमें किसी भी संभावित संशोधन पर चर्चा के लिए इसी हफ्ते एक बैठक बुलाई गई थी।
सूत्रों का कहना है, भारत में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के लिए एक नियम है, लेकिन उन दवाओं के लिए कोई दिशानिर्देश या सूची नहीं है, जिन्हें काउंटर पर बेचा जाना चाहिए। टीम का मानना है कि ऐसा करने से लोगों तक इसकी पहुंच को बढ़ाने में मदद मिल सकेगी। विशेषतौर पर ग्रामीण इलाकों में जहां पर मेडिकल स्टोर के लिए काफी दूर तक जाना होता है वहां जनरल स्टोर पर इसकी उपलब्ध्ता से लोगों लिए सहूलियत हो सकती है।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में नाम न छापने की शर्त पर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर मेडिसिन के डॉक्टर (नाम न छापने की शर्त पर) कहते हैं, अगर हम विदेशों की तुलना करके भारत में भी इस तरह के नियम लागू करने पर विचार कर रहे हैं तो ये समझना जरूरी है कि यूएस-यूके जैसे देशों में हेल्थ केयर का रेगुलेटेड नेटवर्क है, जबकि भारत में अब भी ये बड़ी चुनौती रही है।
भारत में बहुत बड़ी आबादी क्वेक्स (झोलाछाप डॉक्टर्स) के पास जाती है, इसमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो बिना रोगी की पूरी हिस्ट्री देखे दवा दे देते हैं जिसके कई मामलों में गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव भी देखे जाते रहे हैं। अगर ये दवाएं जनरल स्टोर पर मिलने लगीं, जिनकी कोई मॉनीटरिंग नहीं है तो लोगों की सेहत पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हम पहले से ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को लेकर संकट में हैं, दर्द निवारक दवाओं के किडनी-लिवर पर गंभीर दुष्प्रभाव देखे जाते रहे हैं।
फैसला ठीक पर रेगुलेशन पर देना होगा ध्यान
वहीं दूसरी तरफ भोपाल स्थित मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, अगर ये फैसला लागू होता है तो दवाओं की सहज उपलब्धता की दृष्टि से ये बेहतर कदम हो सकता है। अगर इसका एक सिस्टम के साथ कार्यान्वयन किया जाता है तो हेल्थकेयर डिलीवरी की दिशा में इसके अच्छे परिणाम देखे जा सकते है। यहां अच्छी मॉनीटरिंग सिस्टम के साथ विक्रेताओं की नैतिक जिम्मेदारी अति महत्वपूर्ण हो जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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