Brain Health: लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने शरीर के सभी अंगों को प्रभावित किया है। हृदय रोग, डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याओं की तो हम सभी अक्सर चर्चा करते हैं पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कम उम्र के लोगों में बढ़ती मस्तिष्क की बीमारियों को लेकर काफी चिंता जता रहे हैं। लोगों की एकाग्रता, याददाश्त, मूड और निर्णय क्षमता में हाल के वर्षों में काफी गिरावट देखी गई है। डॉक्टर्स का मानना है कि नींद की कमी इन समस्याओं का मुख्य कारण हो सकती है।
Brain Health: दिमाग रहेगा हमेशा एक्टिव और स्वस्थ, बस अपनाएं न्यूरोलॉजिस्ट की बताई ये एक आदत
- भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60% से अधिक लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते है।
- नींद सिर्फ शरीर के आराम के लिए ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
दिल्ली स्थित एक अस्पताल में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ भास्कर शुक्ला कहते हैं, अगर आप पूछते हैं कि ब्रेन हेल्थ के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है तो मैं कहूंगा- अच्छी नींद। रात में 7-9 घंटे की निर्बाध नींद जो आपको बिल्कुल तरोताजा कर देती हो।
कई कारणों चाहे देर तक ऑफिस में काम हो, रील्स देखने की आदत हो या पढ़ाई का बढ़ता समय, लोगों को पर्याप्त नींद नहीं मिल पा रही है जिसका परिणाम ये होता है कि जब वह सो कर उठते हैं तो भी थकान जैसा महसूस करते हैं।
अध्ययनों में पाया गया है कि जिनको लंबे समय तक ये दिक्कत बनी रहती है उनमें और भी कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। अगर आपकी भी नींद पूरी नहीं हो रही है तो ये सेहत के लिए रेड फ्लैग हो सकता है।
दिमाग की क्षमता हो सकती है कमजोर
दिमाग को ठीक तरीके से काम करने में मदद के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है। नींद के दौरान दिमाग दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है और याददाश्त को मजबूत करता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि नींद की कमी से बच्चों में सीखने की क्षमता 40% तक घट जाती है। छात्रों को पाठ याद करने में कठिनाई, ध्यान भटकने और परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डिप्रेशन का खतरा
अच्छी नींद लेने से दिमाग को याद रखने और सीखने में मदद करने वाले हिस्से हिप्पोकैम्पस पर नकारात्मक असर होता है, जिसके कारण आपको चीजें बार-बार भूल सकती हैं। इसलिए बच्चों और युवाओं को कम से कम 7-9 घंटे की गहरी नींद जरूरी है।
इसके अलावा नींद की कमी मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे रसायनों के संतुलन को बिगाड़ देती है, जो मूड को नियंत्रित करते हैं और आपको खुश महसूस कराते हैं।
नेशनल स्लीप फाउंडेशन में प्रकाशित इसी से संबंधित एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा 3 गुना ज्यादा होता है। ऐसे लोगों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव की समस्या भी अधिक देखी जाती है।
बच्चों के मस्तिष्क पर असर
अच्छी नींद सभी के लिए जरूरी है, बच्चों के लिए ये और भी जरूरी हो जाता है।
डॉक्टर बताते हैं, अच्छी नींद के दौरान बच्चों का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है। इस समय दिमाग नई कोशिकाएं बनाता है और सीखने की क्षमता मजबूत होती है। जो बच्चे 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें ध्यान केंद्रित करने और भावनात्मकता की क्षमता कमजोर होती है। इतना ही नहीं नींद की कमी वाले बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) की दिक्कत भी अधिक देखी जाती है।
-------------
स्रोत:
Sleep Deprivation and Brain Health
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।