15 अक्तूबर को हर साल विश्व भर में ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया जाता है। इस डे का उद्देश्य लोगों में हाथ धोने के लिए जागरूकता फैलाना है, क्योंकि हर साल बहुत सारे लोग हाथ न धोने के कारण किसी न किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। केवल खाना खाने के पहले ही नहीं बल्कि हाथों की स्वच्छता हर समय रखना बेहद जरूरी है। इस तरह की आदत हमेशा ही हमें स्वस्थ रखने में मदद करती है।
सरकार के जागरूकता मिशन के बाद बहुत से लोग हाथ धोने के ध्यान रखते हैं, साथ ही अपने बच्चे को भी सिखाते हैं। इसी जागरूकता का ही नतीजा है कि बिना साबुन और पानी के हाथों को साफ करने के लिए सैनेटाइजर का प्रयोग शुरू किया गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सैनिटाइजर बच्चों के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह।
हाथों की सफाई के लिए शुरू की गई मुहिम में लोगों ने बच्चों को सैनिटाइजर से हाथ साफ कराने की आदत डाल दी, लेकिन जरूरत से ज्यादा इसका प्रयोग अब बच्चों में कई तरह की बीमारियों को न्योता दे रहा है।
सैनिटाइजर के बहुत ज्यादा प्रयोग से करीब 70 हजार बच्चों को कई सारी तकलीफों का सामना करना पड़ा था, जिसमें आंखों में जलन, सूजन और लाली की समस्या हो रही थी। इसके साथ ही बच्चों के पेट में दर्द, उल्टी और खांसी की समस्या भी हुई, जिसमें से ज्यादातर बच्चे पांच साल कम उम्र के थे।
बच्चों के इतना बीमार पड़ने के बाद भी डॉक्टरों ने सैनिटाइजर का इस्तेमाल बंद करने की सलाह नहीं दी। डॉक्टरों ने कहा कि आप बस बच्चों के सैनिटाइजर इस्तेमाल पर नजर रखें। उनका मानना है कि पानी और साबुन के न होने पर सैनिटाइजर, हाथ साफ करने का एक बेहतरीन विकल्प है। डॉक्टरों के अनुसार 60 प्रतिशत एल्कोहल वाले सैनिटाइजर सबसे अच्छे होते हैं।
इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी बच्चे को सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना हो तो बड़े को निगरानी रखनी चाहिए और इसके इस्तेमाल का सही तरीका बताना चाहिए। स्कूल में भी अगर छोटे बच्चे सैनिटाइजर का प्रयोग कर रहे हैं तो जरूरत है कि उनके टीचर उन पर निगाह रखें।