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Covid-19 Alert: जनवरी में चौथी लहर की आशंका? ये दो स्थितियां बढ़ा रही हैं खतरा- विशेषज्ञ से समझिए

Fri, 30 Dec 2022 07:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 30 Dec 2022 07:26 PM IST
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fourth wave of covid in india, know its risk factor, impact of weather on COVID-19 pandemic
भारत में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : istock

चीन सहित दुनिया के कई देशों में इन दिनों कोरोना का गंभीर असर देखा जा रहा है। संक्रमण की स्थिति के लिए विशेषज्ञ मुख्यरूप से ओमिक्रॉन के BF.7 वैरिएंट को प्रमुख कारण मान रहे हैं, जिसकी गंभीरता को कम है पर संक्रामकता के लिहाज से यह चिंता बढ़ाने वाला है। भारत में कोरोना की स्थिति की बात करें तो यहां हालात काफी नियंत्रित लग रहे हैं, दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा फिलहाल काफी नियंत्रित है। पिछले 24 घंटे में 243 लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। वैश्विक खतरे को ध्यान में रखते हुए लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील की जा रही है।



इस बीच हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विशेषज्ञों ने अगले डेढ़ महीने तक लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। सरकारी अधिकारियों ने लोगों को आगाह किया है कि अगले 40 दिनों में देश में कोरोना के मामलों में उछाल देखे जा सकते हैं। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते रहना और टीकाकरण को बढ़ाना बहुत आवश्यक है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जनवरी के महीने में देश में कोरोना की चौथी लहर आ सकती है? कुछ स्थितियां इस जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, आइए इस बारे में समझते हैं।

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कोरोना संक्रमण और जोखिम - फोटो : iStock

पिछली लहरों की स्थिति का आकलन

एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए मीडिया से कहा, पिछले तीन साल के जैसे अनुभव रहे हैं उसका आकलन करें तो माना जा सकता है कि अगले डेढ़ महीने हमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अतीत में वैश्विक स्तर पर जब भी कोरोना के मामले बढ़े हैं उसके एक से डेढ़ माह के बाद भारत में भी इसका असर देखा गया है।

इस आधार पर हमें आशंका है कि जनवरी में देश में संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। हालांकि इसकी गंभीरता कम रहने के अनुमान है, इस खतरे को ध्यान में रखते हुए हमें अभी से अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है।

कोरोना के पिछले पैटर्न को देखें तो निश्चित ही यह डर हो सकता है, इसके अलावा भी कुछ स्थितियां हैं जो अलर्ट करती हैं।

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सर्दियों के मौसम में बढ़ता रहा है संक्रमण - फोटो : PTI

कोरोना के पैटर्न को समझिए

साल 2019 के आखिर में पहली बार कोरोना की शुरुआत से लेकर अब तक के पैटर्न को देखें तो स्पष्ट होता है कि सर्दियों के मौसम में संक्रमण बढ़ा है। डेल्टा वैरिएंट के कारण देश में आई दूसरी लहर फरवरी से शुरू होकर मार्च-अप्रैल 2021 में आई। इसके बाद साल 2022 में संक्रमण की तीसरी लहर देखी गई, जिसका असर जनवरी-फरवरी में अधिक रहा। अध्ययनों में भी इस बात की पुष्टि होती है कि तापमान गिरने की स्थिति वायरस को बढ़ने में मदद करती है।

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कोरोना के जोखिम कारकों को ध्यान में रखें - फोटो : pixabay

सर्दियों में कोरोना का जोखिम

मौसम आधारित कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डेविड रेलमैन कहते हैं, सर्दी के मौसम में कोरोना के अधिक संक्रामक होने के मामले देखे गए हैं। इन्फ्लूएंजा जैसे श्वसन संक्रमण का कारण बनने वाले वैरिएंट्स की संक्रामकता प्रकृति सर्दियों के मौसम में बदल जाती है। प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2  वायरस भी ठंड और शुष्क परिस्थितियों में अधिक संक्रामकता का कारण बन सकता है। 

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कोरोना संक्रमण की समस्या - फोटो : iStock

खराब वेंटिलेशन और तापमान भी कारक

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मैथमेटीशियन मौरिसियो सैंटिलाना कहते हैं ठंड के दिनों में लोगों का बाहर आना-जाना कम हो जाता है। घरों-ऑफिस में लंबे समय तक लोगों का एक-दूसरे के साथ नजदीकी संपर्क भी अधिक होता है। खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों में संचरण का खतरा बढ़ जाता है, सर्दियों में कोरोना के बढ़ने के लिए इसे भी एक कारक के तौर पर देखा जा सकता है।

इस तरह का माहौल वायरस को तेजी से फैलने में मदद करता है, इसके अलावा सर्दी के मौसम में तापमान की कमी भी वायरस के लिए अनुकूल स्थिति वाली होती है।

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