उम्र बढ़ना शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन शरीर की जैविक उम्र हमेशा कैलेंडर वाली उम्र के बराबर नहीं होती। वैज्ञानिक अब ऐसे संकेतकों का अध्ययन कर रहे हैं जिनसे यह समझा जा सके कि असल में शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है। जैविक आयु आपके शरीर की कोशिकाओं, अंगों और समग्र कार्यप्रणाली के स्वास्थ्य पर आधारित अनुमानित आयु है।
अलर्ट: शरीर को तेजी से बूढ़ा बना रही होती हैं आपकी रोज की ये आदतें, हो जाएं सावधान
शरीर की जैविक उम्र कैलेंडर की उम्र से अलग हो सकती है। धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, खराब खान-पान, नींद की गड़बड़ी और शराब जैसी आदतें तेजी से आपके शरीर को बूढ़ा बनाने वाली हो सकती हैं। नियमित गतिविधि, अच्छी डाइट और स्वस्थ जीवनशैली शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
पूरा दिन बैठे रहना खतरनाक
शरीर को स्वस्थ रखने, खून का संचार ठीक रखने के लिए नियमित गतिविधि की जरूरत होती है। लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना यानी कोई मेहनत न करना मोटापा, मेटाबॉलिक समस्याओं और दूसरी क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।
- समय से पहले जैविक उम्र बढ़ने के कारणों को समझने को लेकर हुई रिसर्च में भी शारीरिक गतिविधियों में कमी को जिम्मेदार गया है।
- साल 2025 के एक अध्ययन में पाया गया कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहना आपको लाभ दे सकता है। यानी रोज वॉक, व्यायाम करना सिर्फ वजन के लिए नहीं, स्वस्थ तरीके से उम्र बढ़ने में भी मददगार हो सकती है।
डाइट का भी पड़ता है असर
अध्ययनों में पाया गया है कि बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड्स और चीनी वाली चीजें खाना शरीर में कई मेटाबॉलिक समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।
- रिसर्च में बेहतर डाइट को उन खतरों को कम करने वाला पाया गया है जो शरीर की उम्र को तेजी से बढ़ाती हैं। अच्छी सेहत लिए डाइट में फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और स्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
धूम्रपान-शराब की आदत
धूम्रपान शरीर के लगभग हर प्रमुख हिस्से को नुकसान पहुंचाता है और समय से पहले बीमारी व मृत्यु के जोखिमों को भी बढ़ाता है।
- जैविक उम्र से जुड़े अध्ययनों में धूम्रपान और शराब के सेवन को उम्र बढ़ने वाले संकेतकों को बढ़ाने वाला पाया गया है। साथ ही लगातार तनाव, ज्यादा वजन और खराब जीवनशैली भी उम्र को स्वस्थ तरीके से बढ़ने में बाधा डाल सकते हैं।
नींद की कमी का सेहत पर असर
नींद की गड़बड़ी की वजह से सिर्फ थकान-कमजोरी नहीं होती है, लंबे समय में बनी रहने वाली नींद की समस्या शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिमाग की कार्यक्षमता और प्रतिरक्षा तंत्र पर भी असर डाल सकती है।
2026 की समीक्षा में पाया गया कि नींद से जुड़ी समस्याएं तेज से जैविक उम्र बढ़ाने का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती। इसलिए रोज देर रात तक जागना, नींद कम लेना या नींद की गुणवत्ता खराब होना भी लंबे समय में सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।