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बिना सोचे-समझे खूब सारा खा रहे हैं तो आप हो सकते हैं 'इमोशनल ईटिंग' का शिकार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Thu, 02 May 2019 12:25 PM IST
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कभी बिना सोचे समझे खूब सारा स्नैक्स, चॉकलेट या मीठा खाया है। कभी ना कभी ऐसा जरूर किया होगा, जब भूख भी ना लगी हो और बिना सोचे समझे आपने खूब सारा खा लिया हो। ऐसा बार-बार करने का मतलब है कि आप खुद पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। इसे ही 'इमोशनल ईटिंग' कहते हैं। जानिए क्या हैं इसके लक्षण।
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इमोशनल ईटिंग को आमतौर पर ‘नकारात्मक भावनाओं को शांत करने के लिए जरूरत से ज्यादा खाने’ के तौर पर जाना जाता है। ऐसा करने से नकारात्मक और परेशान करने वाले विचारों और भावनाओं जिसमें गुस्सा, डर, थकान शामिल है, को दबाती है। इस स्थिति में हम प्रतिकूल स्थिति से बाहर निकलने की अस्थायी कोशिश करते हैं। यह कोशिश समस्या को जड़ से खत्म नहीं होती है। करियर, रिलेशनशिप, परिवार या हेल्थ से जुड़ी भावनात्मक परेशानियों के कारण हो सकता है कि लोग बहुत अधिक खाना शुरू कर दें. जो हमें ओवरइटिंग, वजन बढ़ने जैसी बीमारियों को बढ़ावा देता है।
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इमोशनल ईटिंग के मामले में इसे नियंत्रित करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसके मुख्य कारणों में से एक यह है कि ये अक्सर अनजाने में शुरू होता है। ऐसा होता है कि आपका पेट भर गया हो फिर भी आप खाना चाह रहे हों या हो सकता है कि फिल्म देखने के दौरान आप खूब सारा खा लें, लेकिन आपको पता ही न चले कि आप कितना खा चुके हैं। हम इमोशनल ईटिंग में अक्सर इसलिए शामिल हो जाते हैं क्योंकि खाने को एक सांत्वना के रूप में देखते हैं। लोग चॉकलेट बार या आइसक्रीम टब को अपनी परेशानियों से उभरने का एक जरिया समझने लगते हैं।
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ये तरीका हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। दुविधा यह भी है कि जब किसी को अपने शरीर से नफरत या घृणा हो जाती है, तो वो भी 'इमोशनल ईटिंग' की तरफ बढ़ जाता है क्योंकि वह उस चीज का सामना नहीं करना चाहते या वह ऐसे कदम नहीं उठाना चाहता है, जिससे उसके मन में आए नकारात्मक विचार खत्म हो जाएं।
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इमोशनल ईटिंग के बारे में ध्यान रखने वाली बात यह है कि वास्तव में इसका आपकी भूख से कुछ लेना-देना नहीं है। यह भूख नहीं है, जिसके कारण लोग खाते हैं बल्कि यह खाने की लालसा (क्रेविंग) है, जो आपको अस्थायी रूप से अच्छा महसूस कराती है और आपको इसकी आदत पड़ जाती है। ऐसा हमारे शरीर में शुगर रिलीज होने के कारण होता है। यही वजह है कि हम बिना सोचे-समझे खाने लगते हैं।
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