Medically Reviewed by Dr. Arunesh kumar
डॉ अरूणेश कुमार, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और चेस्ट इंस्टीट्यूट, चीफ
पारस हेल्थकेयर, दिल्ली
डिग्री- एम.बी.बी.एस, सीसीएसटी, एमआरसीपी, पीजी- चेस्ट, टीबी
अनुभव- 20 वर्ष
जो लोग समझते हैं कि टीबी यानी क्षयरोग हमारे फेफड़ों को क्षतिग्रस्त करने वाला पल्मोनरी रोग है, उन्हें दोबारा अपनी सोच पर विचार कर लेना चाहिए। चिकित्सा आंकड़े बताते हैं कि भारत में टीबी के 5 से 10 प्रतिशत मरीज बोन टीबी से पीड़ित होते हैं और बोन टीबी के प्रति लापरवाही बरतने के कारण ऐसे मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है जिसमें टीबी बैक्टीरिया हड्डियों और रीढ़ तक को प्रभावित कर देता है। भारत तकरीबन एक लाख ऐसे लोगों का ठिकाना है जो ऑस्टियोअर्टिकुलर ट्यूबरकोलोसिस से पीड़ित हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए किस तरह क्षयरोग हडि्डयों और जोड़ों को प्रभावित करता है।
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यह रोग हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है
- फोटो : Pixabay
रीढ़ के जोड़ को नुकसान पहुंचाता है
हालांकि टीबी शुरू-शुरू में फेफड़ों को ही प्रभावित करता है लेकिन धीरे-धीरे यह रक्तप्रवाह से होते हुए शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है जिसे आम तौर पर एक्स्ट्रापल्मोनरी या डिसेमिनेटेड ट्यूबरकोलोसिस कहा जाता है। आम तौर पर लंबी हड्डियों और वर्टिब्रे (रीढ़ के जोड़) को नुकसान एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरकोलोसिस का बड़ा कारण माना जाता है और यह यह रोग हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। साथ ही इसमें कोई भी हड्डी प्रभावित हो सकती है लेकिन अमूमन यह रीढ़ और वजन सहने वाले जोड़ों मसलन हाथ, कलाइयों और कुहनियों पर ही आक्रमण करता है। दर्द का प्रकार भी क्षयरोग के सटीक स्थान पर निर्भर करता है। मसलन स्पाइन टीबी के मामले में पीठ के निचले हिस्से में दर्द इतना भयंकर होता है कि मरीज को इलाज कराना पड़ जाता है।
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बोन टीबी पीड़ित मरीजों को सोते समय ज्यादा तकलीफ होती है
- फोटो : social media
अर्थराइटिस से अलग है दर्द
बोन टीबी को शुरुआती चरण में अर्थराइटिस रोग होने की भूल हो जाती है। इसलिए इसे अर्थराइटिस के दर्द से अलग समझने के लिए मरीजों को इसके दर्द की प्रकृति पर गौर करना चाहिए। अर्थराइटिस के ज्यादातर मरीजों को रात में सोते समय राहत महसूस होती है। लेकिन बोन टीबी पीड़ित मरीजों को सोते समय ज्यादा तकलीफ होती है क्योंकि इस दौरान बैक्टीरिया की गतिविधि बढ़ जाती है।
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बोन इंफेक्शन हड्डियों में लगातार दर्द का कारण होता है
- फोटो : सोशल मीडिया
कूल्हे और घुटनों के जोड़ होते हैं क्षतिग्रस्त
स्पाइनल ट्यूबरकुलोसि को ‘‘पाॅट्स’’ रोग भी कहा जाता है जो आम तौर पर रीढ़ के दुर्गम हिस्से को प्रभावित करता है। इसमें लगातार और असह्य पीठ दर्द होता है क्योंकि इसके वायरस वर्टिब्रे को सुरक्षा देने वाले डिस्क को क्षतिग्रस्त करते रहते हैं। जोड़ों का टीबी अकड़न के साथ ही दर्द का कारण बनता है। ट्यूबरकुलोसिस ऑस्टियोमायलिटिस यानी बोन इंफेक्शन हड्डियों में लगातार दर्द का कारण होता है और इसके आसपास के टिश्यू की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं, यदि कलाई प्रभावित है तो ‘‘कार्पेल टनेल सिंड्रोम’’ जैसी समस्या होती है। जोड़ो के टीबी से प्रभावित व्यक्ति के कूल्हे और घुटनों के जोड़ धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं।
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हड्डियां कमजोर होने लगती हैं
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फैलता है स्पाइनल टीबी
इसी तरह इलाज नहीं होने पर स्पाइनल ट्यूबरकुलोसिस एक वर्टिब्रे से दूसरे वर्टिब्रे तक फैल सकता है, हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और इनके बीच कुशन का काम करने वाली डिस्क क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। गंभीर मामलों में रीढ़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है और स्पाइनल काॅर्ड संकुलित हो सकता है, जो शरीर के निचले हिस्से में लकवे का कारण बन सकता है।