इबोला इन दिनों वैश्विक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। कांगो और युगांडा से बीते दिनों शुरू हुआ प्रकोप अब दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाते जा रहा है। इसका असर ये रहा कि नई दिल्ली में 28-31 मई को आयोजित होने वाले भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को भी स्थगित कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पहले ही इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर चुका है। इसके साथ लोगों से अपील की जा रही है कि वे इबोला संक्रमण से बचे रहने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
Ebola outbreak: 600 से ज्यादा लोग संक्रमण का शिकार, क्या फिर से मास्क लगाना होगा जरूरी?
Ebola Alert: इबोला खतरनाक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लगते हैं। इससे बीमारी की पहचान देर से होती है और संक्रमित व्यक्ति अनजाने में दूसरों तक वायरस फैला सकता है। तो क्या फिर से मास्क लगाना जरूरी होने जा रहा है? इबोला से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?
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इबोला का लेटेस्ट अपडेट
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के दुर्लभ स्ट्रेन का प्रकोप शुरू होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर ये इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा प्रकोप बन गया है।
- यह दुनिया के सबसे अस्थिर और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में तेजी से फैल रहा है, जिससे अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं।
- कुछ जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहायता में की गई कटौती इस बोझ को और बढ़ा रही है।
- इबोला के मौजूदा प्रकोप से पैदा हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को डब्ल्यूएचओ ने उच्च से बढ़ाकर बहुत उच्च कर दिया है।
- शुक्रवार को जारी एक अपडेट में, डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने यह भी कहा कि अफ्रीका के अधिकतर क्षेत्र में यह जोखिम उच्च है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसका खतरा कम ही है।
- इस प्रकोप में अब तक कम से कम 600 संदिग्ध मामले सामने आए हैं और 139 मौतें हुई हैं।
क्या फिर से लगाना होगा मास्क?
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि देश में अब तक संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है।
- भारत में संक्रमण के जोखिमों को लेकर सवाल इसलिए खड़े होने लगे थे क्योंकि नई दिल्ली में 28-31 मई को आयोजित होने वाले भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को भी स्थगित कर दिया गया है।
- वैसे तो विदेश मंत्रालय ने इसको स्थगित करने के कारणों का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं किया लेकिन कहा कि चूंकि अफ्रीकी देशों में इन दिनों इबोला का असर देखा जा रहा है, इसलिए संभवत: ये कदम उठाया गया है।
अब दूसरा सवाल कि क्या फिर से मास्क लगाना जरूरी होगा?
इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नहीं मास्क लगाकर इबोला से नहीं बचा जा सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने से बचना जरूरी है।
फिर क्या उपाय किए जाने चाहिए?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इबोला का संक्रमण कोविड की तरह हवा के जरिए नहीं फैलता।
- ये संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, पसीना, उल्टी या वीर्य के संपर्क से दूसरे व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है।
- इसलिए चूंकि ये श्वसन संक्रमण नहीं है इसलिए बचाव के लिए मास्क लगाने की जरूरत नहीं है।
- संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार, वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से बचकर इबोला के खतरे को कम किया जा सकता है।
क्यों इतना खतरनाक माना जाता है इबोला
इबोला दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रामक रोगों में से एक माना जाता है। इसकी मृत्यु दर काफी ज्यादा हो सकती है।
- डब्ल्यूएचओ के मुताबिक संक्रमित में इसकी मृत्युदर 30 से 50% तक रही है।
- इबोला संक्रमण में शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं और गंभीर मामलों में रक्तस्राव, मल्टी-ऑर्गन फेल्योर और मौत तक हो सकती है।
- 2026 में फैल रहे बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इबोला को और भी खतरनाक माना जाता है।
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स्रोत:
Ebola Outbreak Is Now Third Largest in History. Here’s What to Know.
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