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सावधान: ऐसे लक्षणों का मतलब फेफड़ों में बन रहा है रक्त का थक्का, जानिए कैसे रहें इस समस्या से सुरक्षित?

Sun, 21 Nov 2021 02:20 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 21 Nov 2021 02:20 PM IST
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early stage blood clot symptoms in lungs, know how to prevent it
फेफड़ों में रक्त जमने की समस्या - फोटो : iStock

हमारे शरीर के लिए जो भी चीज जितनी फायदेमंद होती है, उसकी अधिकता या कमी की स्थिति उतनी ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। ब्लड क्लॉटिग यानी कि रक्त के जमाव की स्थिति भी ऐसी ही है। चोट लगने पर, स्वाभावित रूप के रक्त के थक्के जमने से अत्यधिक रक्त हानि की समस्या से बचा जा सकता है। एक बार जब चोट ठीक हो जाती है तो रक्त के थक्के स्वाभाविक रूप से घुल जाते हैं। हालांकि यदि यह बिना घुले लगातार बने रहते हैं, तो यह स्थिति गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। रक्त के थक्कों का बना रहना खून के सुचारू परिसंचरण में बाधा उत्पन्न कर सकता है। वहीं यदि रक्त, फेफड़े जैसे अंगों में जमा होने लगें तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।



अध्ययनों से पता चलता है कि फेफड़ों में होने वाली ब्लड क्लॉटिग अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक और दिल के दौरा पड़ने का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फेफड़ों में रक्त जमा होने के लक्षण शरीर के अंगों पर देखे जा सकते हैं, जिसे पहचान कर गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि इसकी पहचान कैसे की जा सकती है?

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फेफड़े में ब्लड क्लॉटिग - फोटो : Pixabay

फेफड़ों में रक्त जमा होने की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फेफड़ों में रक्त जमा होने की स्थिति आपके श्वसन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। रक्त के थक्कों का लगातार बने रहना सांस लेने में तकलीफ, कुछ मामलों में सीने में दर्द और पीठ के ऊपरी हिस्से में सांस लेते समय तेज दर्द का कारण बन सकता है। गंभीर स्थितियों में रोगियों को खांसी के साथ खून आने की भी समस्या हो सकती है, इस बारे में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

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फेफड़ों का रखें विशेष ख्याल - फोटो : iStock

रक्त के थक्के बनने के जोखिम कारक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो शरीर स्वयं रक्त के थक्कों को बनाने और इसे खत्म करने की क्षमता रखता है, हालांकि कुछ विशेष स्थितियां इस समस्या को बढ़ावा दे सकती हैं। रक्त के थक्के बनने का खतरा कुछ लोगों में अधिक हो सकता है, ऐसे जोखिम कारकों को समझने की आवश्यकता है।

  • वजन ज़्यादा होना
  • गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक उपयोग करना।
  • गर्भावस्था
  • प्रसव
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस।
  • क्रोहन डिजीज।
  • 60 वर्ष से अधिक आयु का होना।
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रक्त जमाव का जोखिम - फोटो : Pixabay

ऐसी सावधानियां बरतना आवश्यक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जोखिम कारकों को समझते हुए यदि आपमें रक्त के थक्कों के बनने का खतरा अधिक है तो कुछ विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है। इन बातों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक होता है।

  • बहुत देर तक बैठने से पैरों की नसों में होने वाले रक्त प्रवाह में बाधा हो सकती है, जो गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
  • अगर आप किसी कारणवश ज्यादा चल फिर नहीं सकते तो पैरों का व्यायाम जरूर करें।
  • एक ही जगह पर ज्यादा देर तक बैठने से बचें।
  • शराब और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।
  • निर्जलीकरण को रोकने के लिए खूब पानी पिएं।
  • वजन कम करें। 
  • पैर की उंगलियों को जमीन पर टिकाते हुए अपनी एड़ियों को ऊपर उठाएं और नीचे करें, यह अभ्यास लाभदायक माना जाता है।
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फेफड़ों की देखभाल जरूरी - फोटो : istock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जीवनशैली में गड़बड़ी के कारण रक्त के थक्कों के बनने का खतरा किसी भी उम्र वाले लोगों को हो सकता है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण यह जोखिम बढ़ जाता है, इससे विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि आपके फफड़ों जैसे किसी नाजुक अंग में  रक्त के थक्के बनने की समस्या है, तो इस बारे में किसी डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज करें और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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