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बड़ी खबर: ब्लैक फंगस की पुष्टि करना अब हुआ बेहद आसान, 24-48 घंटे में मिलेगा सटीक परिणाम

Sat, 12 Jun 2021 11:32 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 12 Jun 2021 11:32 AM IST
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ब्लैक फंगस का पता लगाना हुआ आसान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के साथ पिछले दिनों ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस), व्हाइट और येलो फंगस के मामले भी सामने आए हैं। विशेषज्ञ इन तीनों को काफी संक्रामक और गंभीर मानते हैं। इतना ही नहीं ब्लैक फंगस को कई राज्यों ने महामारी तक घोषित कर दिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 28 हजार से ज्यादा लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पहले भी ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले आते रहे हैं, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल के कारण यह ज्यादा चर्चा में आ गया है। चूंकि इस बारे में पहले से लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है इसलिए इसको लेकर काफी भ्रम का माहौल भी देखने को मिल रहा है।


ब्लैक फंगस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच लोगों में आसानी से इसकी पहचान कर पाना अब तक चिंता बना हुआ था। हालांकि अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसे किट के बारे में बताया है जिससे 24-48 घंटे के भीतर ही संक्रमण का पता लगाया जा सकेगा। यह किट इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रोगियों में म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण का जितना जल्दी पता चल जाए उनका इलाज उतना ही आसान हो जाता है और जान बचाने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

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डच किट से कर सकेंगे ब्लैक फंगस की पुष्टि - फोटो : istock
डच किट से होगा परीक्षण आसान
नारायण नेत्रालय, बैंगलोर के चेयरमैन डॉ के भुजंग शेट्टी और उनकी टीम ने ब्लैक फंगस का शीघ्रता से पता लगाने के लिए एक विशेष प्रकार के किट के बारे में सूचित किया है। इसे 'डच किट' नाम दिया गया है। डॉ शेट्टी बताते हैं कि डच किट के परीक्षण की प्रभावकारिता कोविड-19 के लिए आरटी-पीसाआर के बराबर की है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह संक्रमण की जल्द पुष्टि कर होने वाली मौत के आंकड़ों को कम करने में काफी सहायक हो सकता है।
 
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ब्लैक फंगस की जांच का नया तरीका - फोटो : Social media

विशेषज्ञ इस किट को मान रहे हैं वरदान
डॉ शेट्टी कहते हैं- पिछले दिनों देश में ब्लैक फंगस संक्रमण के कारण लोगों में खासा डर का माहौल देखा गया है। हमने बहुत से रोगियों को देखा जिनको नाक बंद होने या चेहरे के कुछ हिस्से में दर्द की शिकायत थी। ऐसे में लोग जल्द से जल्द म्यूकोरमाइकोसिस का पता लगाकर इसका इलाज कराने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि हमारे पास इसके त्वरित निदान के लिए कोई उपकरण नहीं है। इन समस्याओं को कम करने में डच किट काफी फायदेमंद हो सकती है।

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ब्लैक फंगस की सभी किस्मों की हो सकेगी जांच - फोटो : Pixabay
जानिए कैसे काम करेगी यह किट?
विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस संक्रमण के परीक्षण के लिए रोगी के रक्त और घाव का नमूना लिया जाता है।ब्लैक फंगस की पांच मुख्य किस्में हैं और इस किट के माध्यम से इन सभी का परीक्षण कर आसानी से अंतर किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इसके परीक्षण की सटीकता भी 100 प्रतिशत बताई जा रही है। इस किट से 25 रोगियों का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। एक किट की कीमत करीब 7000 रुपए बताई जा रही है।




 
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अब तक संक्रमण का पता लगाने में लगता था लंबा समय - फोटो : Social media

संक्रमण की पुष्टि करने में लगता था ज्यादा समय
फिलहाल देश में मौजूद तकनीक के माध्यम से ब्लैक फंगस की पुष्टि करने में 10-15 दिन तक लग जाते थे। ब्लैक फंगस का सटीक ग्रुप जानने से पहले लैब में कल्चर करने की आवश्यकता होती थी। डट-किट के माध्यम से अब यह परीक्षण अधिकतम 48 घंटे में ही किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस की समय से पहचान न हो पाने के कारण लोगों में मौत का खतरा अधिक देखा जा रहा था।

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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्ट के के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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