फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

विशेषज्ञ से जानिए: क्या गंभीर कोरोना संक्रमण बनाती है मजबूत प्रतिरक्षा? जानिए हल्के और एसिम्टोमेटिक रोगियों की स्थिति

Sun, 13 Jun 2021 01:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 13 Jun 2021 01:53 PM IST
विज्ञापन
does severe covid infection gives more protection
शरीर में बनी एंटीबॉडीज - फोटो : Pixabay

Medically reviewed By-


डॉ सुनील बालियान
कोविड इंचार्ज
यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा


दुनियाभर में कोरोना संक्रमण को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। महामारी की शुरुआत से ही वैज्ञानिक नोबल कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर रहे हैं। कोविड संक्रमण या वैक्सीन लगने के बाद या फिऱ दोनों ही स्थितियों के बाद व्यक्ति को वायरस से किस स्तर तक सुरक्षित माना जा सकता है? यह ऐसे गंभीर सवाल रहे हैं जिनपर खूब चर्चा की गई है। समान्य तौर पर शरीर में दो तरह से एंटीबॉडीज बनने की बात कही जा रही है, पहला- संक्रमण के बाद और दूसरी वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी। कई रिपोर्टस में यह दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों को कोरोना का गंभीर संक्रमण हुआ था उनके शरीर में अन्य लोगों की तुलना में एंटीबॉडीज का निर्माण ज्यादा होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों में इसके हल्के या मध्यम लक्षण थे उनमें कितनी प्रभावी एंटीबॉडीज निर्मित होती हैं? इस लेख में हम विशेषज्ञ से ऐसे सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे। 

does severe covid infection gives more protection
कोरोना के गंभीर संक्रमण के बाद अधिक मिलती है अधिक सुरक्षा? - फोटो : iStock

एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को समझिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर संक्रमण वाले रोगियों की तुलना में जिन लोगों को कोरोना के हल्के या एसिम्टोमैटिक लक्षण थे, उनमें एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है।  लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि पीक इम्युनिटी केवल गंभीर बीमारी वाले लोगों में ही बन सकती है? डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना का संक्रमण होते ही शरीर में  पीक इम्युनिटी का निर्माण शुरू हो जाता है। क्या एसिम्टोमैटिक या हल्के लक्षण वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता है? आइए जानते हैं।

does severe covid infection gives more protection
संक्रमण के बाद तीन माह तक शरीर को माना जाता है वायरस से सुरक्षित - फोटो : iStock

गंभीर संक्रमण वाले लोगों में देर तक सक्रिय रहती है प्रतिरक्षा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण की निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद 90 से 120 दिनों तक शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडीज मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि संक्रमण के बाद इस अवधि तक लोगों को काफी सुरक्षित माना जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों में कोरोना का गंभीर संक्रमण था उनमें एंटीबॉडी मार्करों के बढ़े हुए स्तर भी देखे गए हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि गंभीर संक्रमण वाले लोगों की तुलना में जिन लोगों में हल्के या एसिम्टोमैटिक लक्षण थे, उनमें संक्रमण से ठीक होने के बाद प्रतिरक्षा तेजी से कम हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
does severe covid infection gives more protection
रोग प्रतिरोधक क्षमता को पहचानें - फोटो : Pixabay

कोविड-19 का गंभीर संक्रमण और प्रतिरक्षा
डॉक्टरों के मुताबिक कोविड-19 के गंभीर रोगियों में संक्रमण के लक्षण और इसकी गंभीरता अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि ऐसे रोगियों के शरीर को कोरोना से मुकाबले के लिए भी ज्यादा मेहनत की आवश्यकता हो सकती है। वैसे तो इसकी पुष्टि करने के लिए फिलहाल पर्याप्त अध्ययन उपलब्ध नहीं है, फिर भी कुछ केस स्टडी से पता चलता है कि गंभीर कोविड रोगियों की न केवल कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मजबूत होती हैं, साथ ही ऐसे संक्रमितों में मेमोरी टी-सेल प्रतिक्रियाएं भी ज्यादा देखी गई हैं।

विज्ञापन
does severe covid infection gives more protection
कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद वैक्सीनेशन - फोटो : पीटीआई
कोरोना से ठीक होने  के बाद वैक्सीनेशन
साइंस नेचर और बायोरिक्सिव जर्नल में हाल ही में प्रकाशित दो अध्ययनों के मुताबिक  कोरोना संक्रमण के बाद ज्यादातर लोगों में बनीं एंटीबॉडीज कम एक साल तक बनी रहती हैं। इसके पश्चात टीकाकरण के बाद एंटीबॉडीज की गुणवत्ता में और सुधार आता है, जो ता-उम्र उन्हें वायरस से सुरक्षित रख सकती है। इन दोनों अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद वैक्सीन की एक डोज ले चुके लोगों को बूस्टर की आवश्यकता नहीं होती है, यानी कि ऐसे लोगों को वैक्सीन के दूसरे खुराक की कोई खास जरूरत नहीं है।

--------------------
नोट: यह लेख ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ सुनील बालियान सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ सुनील बालियान  को कोरोना के रोगियों के इलाज का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed