डॉ प्रियरंजन
इंटेसिव केयर कंसलटेंट, उजाला सिग्नस
कोरोना वायरस का संक्रमण देशभर में पैर फैला चुका है। लगातार बढ़ते जा रहे मामलों के चलते देश में स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से हिल चुका है। कहीं लोगों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे हैं तो कहीं ऑक्सीजन की भारी कमी देखने को मिल रही है। इस बदहाली में मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर संक्रमण की पुष्टि के लिए कोरोना की जांच भी नहीं हो पा रही है। इन्हीं अव्यवस्थाओं को देखते हुए डॉक्टरों ने लोगों को उनके स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए '6 मिनट का वॉक टेस्ट' करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस उपाय से आप अपने स्वास्थ्य और शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति के बारे में आसानी से जान सकेंगे।
आइए जानते हैं क्या है यह 6 मिनट के जांच की प्रक्रिया?
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ऑक्सीजन सेचुरेशन की करते रहें जांच
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अमर उजाला से बात करते हुए उजाला सिग्नस के इंटेसिव केयर कंसलटेंट डॉ प्रियरंजन कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को सांस की ज्यादा दिक्कत देखने को मिल रही है। जांच के अभाव में कई लोगों में संक्रमण का काफी समय तक पता नहीं चल पाता है और अचानक उन्हें दिक्कतें महसूस होनी शुरू हो जाती हैं। ऐसे लोगों को घर पर ही ऑक्सीमीटर का उपयोग करते हुए शरीर में ऑक्सीजन सेचुरेशन की जांच करते रहना चाहिए।
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6 मिनट के वॉक टेस्ट से जानें सेहत का हाल
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क्या है यह 6 मिनट की टेस्ट?
विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को कोरोना के लक्षण महसूस हो रहे हैं वह प्रारंभिक तौर पर घर पर ही अपने स्वास्थ्य की जांच कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले ऑक्सीमीटर से सेचुरेशन देख लें और फिर 6 मिनट के बिना रुके सामान्य गति से वॉक कीजिए। छह मिनट के बाद अगर ऑक्सीजन का स्तर 3 से 4 डिजिट के नीचे चला जाता है तो उस व्यक्ति को सावधान हो जाने की जरूरत है।
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ऑक्सीमीटर की रीडिंग से पता चलता है सेहत का हाल
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उदाहरण के लिए पहली जांच में ऑक्सीमीटर की रीडिंग 95 आती है। 6 मिनट तक वॉक करने के बाद जांच में अगर यह घटकर 92 या उससे कम हो जाती है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। यह फेफड़ों की समस्या और शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकती है। ऐसे लोगों को तुरंत कोविड टेस्ट कराकर उचित उपचार की शुरुआत कर देनी चाहिए।
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अस्थमा रोगी न करें यह उपाय
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किन्हें नहीं करना चाहिए यह परीक्षण?
डॉक्टरों के मुताबिक जो लोग अस्थमा से पीड़ित हैं उन्हें यह परीक्षण नहीं करना चाहिए। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग छह के बजाय तीन मिनट वॉक करके इस परीक्षण को कर सकते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से ऑक्सीजन की कमी का पता लगाने और सही समय पर रोगी को अस्पतालों में भर्ती करने में मदद मिल सकती है।