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लंबाई बढ़ाने के लिए कभी न करें दवाइयों और पाउडर का सेवन, ये होंगे नुकसान
नीलम शुक्ला
Updated Fri, 23 Feb 2018 10:30 AM IST
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वैदिक ग्राम, नोएडा के आयुर्वेदाचार्य, डॉ. पियूष जुनेजा बताते हैं कि कई लोग अपनी लंबाई बढ़ाने के लिए बिना जांचे-परखे ही बाजार में मिलने वाली दवाइयों और पाउडर का सेवन करने लगते हैं। जिसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। कोई भी दवा लेने या उपाय आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। आपकी लंबाई क्यों नहीं बढ़ रही, यह शारीरिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। लंबाई बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़, शतावरी, यष्टिमधु, गुग्गुल, गुडुची जैसी औषधियां लंबाई बढ़ाने में काफी मदद करती हैं। लेकिन इसे लेने से पहले किसी वैद्य से सलाह जरूर लें।
छोटा कद
लंबाई पर खानपान का असर
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष, डॉ. के. के. अग्रवाल बताते हैं भारत में छोटे कद से पता चलता है कि यहां पोषण का स्तर कम और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम है। लंबाई कम होने का एक प्रमुख कारण है भारतीयों का खानपान। एक निश्चित आयु सीमा में निश्चित पोषक तत्वों वाला भोजन न मिलने का दुष्प्रभाव लंबाई पर पड़ता है। हमारे शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे प्रभावी एचजीएच (एक प्रकार का हार्मोन) होता है, जो एक उम्र तक ही निकलता है और अगर इस उम्र में सही मात्रा में प्रोटीन और उचित मात्रा में आहार न मिले, तो शरीर के विकास की प्रक्रिया रुक जाती है और विकास होना बंद हो जाता है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष, डॉ. के. के. अग्रवाल बताते हैं भारत में छोटे कद से पता चलता है कि यहां पोषण का स्तर कम और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम है। लंबाई कम होने का एक प्रमुख कारण है भारतीयों का खानपान। एक निश्चित आयु सीमा में निश्चित पोषक तत्वों वाला भोजन न मिलने का दुष्प्रभाव लंबाई पर पड़ता है। हमारे शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे प्रभावी एचजीएच (एक प्रकार का हार्मोन) होता है, जो एक उम्र तक ही निकलता है और अगर इस उम्र में सही मात्रा में प्रोटीन और उचित मात्रा में आहार न मिले, तो शरीर के विकास की प्रक्रिया रुक जाती है और विकास होना बंद हो जाता है।
छोटा कद
दर्दनाक, पर प्रभावी है इलिजारोव तकनीक
हड्डी रोग विशेषज्ञ ,डॉ. वी. एस. चौहान बताते हैं लंबाई बढ़ाने के लिए इलिजारोव तकनीक में पैर की हड्डियों को तोड़कर उनमें स्टील की रॉड डाली जाती है आैर रोजाना हड्डियों में एक मिलीमीटर का गैप पैदा किया जाता है। एक अन्य तकनीक में हड्डियों के टिश्यू को तार, रिंग और बोल्ट के जरिए कसा जाता है। एक विशेष दबाव के बीच फ्रेमिंग में हड्डियों के सेल्स को 2-3 महीनों के लिए फिक्स किया जाता है। यह प्रकिया प्लास्टर तकनीक की तरह हड्डियों के नए सेल्स को बनने का मौका देती है। नौ महीने तक की गई फ्रेमिंग के बाद हड्डियों को निर्धारित लंबाई तक बढ़ाया जाता है। इस तकनीक से एक हड्डी को अधिकतम तीन इंच तक बढ़ाया जा सकता है। यह तकलीफदेह व जटिल सर्जरी है और महंगी भी। इसमें मांसपेशियों व नसों के नुकसान का खतरा रहता है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ ,डॉ. वी. एस. चौहान बताते हैं लंबाई बढ़ाने के लिए इलिजारोव तकनीक में पैर की हड्डियों को तोड़कर उनमें स्टील की रॉड डाली जाती है आैर रोजाना हड्डियों में एक मिलीमीटर का गैप पैदा किया जाता है। एक अन्य तकनीक में हड्डियों के टिश्यू को तार, रिंग और बोल्ट के जरिए कसा जाता है। एक विशेष दबाव के बीच फ्रेमिंग में हड्डियों के सेल्स को 2-3 महीनों के लिए फिक्स किया जाता है। यह प्रकिया प्लास्टर तकनीक की तरह हड्डियों के नए सेल्स को बनने का मौका देती है। नौ महीने तक की गई फ्रेमिंग के बाद हड्डियों को निर्धारित लंबाई तक बढ़ाया जाता है। इस तकनीक से एक हड्डी को अधिकतम तीन इंच तक बढ़ाया जा सकता है। यह तकलीफदेह व जटिल सर्जरी है और महंगी भी। इसमें मांसपेशियों व नसों के नुकसान का खतरा रहता है।