What Not To Eat in Diabetes: आज डायबिटीज (मधुमेह) एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है, जिसने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में लिया है। खासकर भारत में, यह संख्या चौंकाने वाली है, जहां लगभग 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता या अनियंत्रित रहता है। अगर इस पर नियंत्रण न किया जाए, तो यह हृदय, किडनी, तंत्रिकाओं और आँखों जैसे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
Diabetes tips: चीनी के अलावा डायबिटीज मरीजों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए ये चीजें, वरना बढ़ सकता है शुगर लेवल
Diabetes Diet Without Sugar: डायबिटीज के मरीजों को आहार में कुछ चीजों से विशेष रुप से परहेज करना चाहिए। चीनी और मीठी चीजों के अलावा कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो खामोशी से ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। आइए इस लेख में ऐसी ही चार चीजों के बारे में जानते हैं।
सफेद चावल
सफेद चावल भारतीय घरों में एक प्रमुख आहार है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए यह सबसे हानिकारक खाद्य पदार्थों में से एक हो सकता है। सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत हाई होता है, जिसका अर्थ है कि यह बहुत तेजी से पचता है और ब्लड शुगर लेवल को तुरंत बढ़ाता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसकी बाहरी परत (चोकर और जर्म) को हटा दिया जाता है, जिससे इसमें फाइबर और पोषक तत्व कम हो जाते हैं। ठीक इसी तरह सफेद ब्रेड, मैदा से बने उत्पाद जैसे बिस्कुट, नूडल्स और पेस्ट्री भी रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं और तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाते हैं। इनकी जगह ब्राउन राइस, क्विनोआ, दलिया, बाजरा, ज्वार जैसे साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए, जिनमें फाइबर अधिक होता है और वे ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं।
ये भी पढ़ें- World Lung Cancer Day: इन गलत आदतों की वजह से बढ़ता है फेफड़ों में कैंसर का खतरा, बरतें ये सावधानियां
आलू और मसालेदार सब्जियां
आलू, शकरकंद और मक्का जैसी कुछ सब्जियों में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में तेजी से ग्लूकोज में परिवर्तित हो सकती हैं। आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी अधिक होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है।
इसके अलावा 'मसालेदार सब्जियां' अक्सर ऐसी सब्जियों को संदर्भित करती हैं जिन्हें बहुत ज्यादा तेल, क्रीम या अन्य अनहेल्दी चीजों के साथ तैयार किया जाता है, जो कैलोरी, अनहेल्दी फैट से भी भरपूर होती हैं। ये न केवल वजन बढ़ाती हैं बल्कि इंसुलिन प्रतिरोध को भी प्रभावित कर सकती हैं। इनकी जगह कम स्टार्च वाली सब्जियां जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), ब्रोकोली, पत्ता गोभी, फूल गोभी, लौकी और खीरा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ये भी पढ़ें- Obesity: मोटापा कम करने के लिए जीवनशैली में करें ये छोटे बदलाव? कुछ दिनों में ही दिखेगा असर
फास्ट फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स
आज की जीवनशैली में फास्ट फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स एक आम विकल्प बन गए हैं, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए ये बेहद खतरनाक हो सकते हैं। बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स और पैकेज्ड कुकीज जैसे खाद्य पदार्थ अनहेल्दी फैट (ट्रांस और संतृप्त वसा), रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, हाई सोडियम और छिपी हुई चीनी से भरपूर होते हैं।
ये सभी कारक न केवल ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, बल्कि इंसुलिन प्रतिरोध को भी बढ़ावा देते हैं, वजन बढ़ाते हैं, और हृदय रोग व हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम भी बढ़ाते हैं। डायबिटीज के मरीजों को इन चीजों से विशेष रूप से परहेज करना चाहिए।
मीठे फल और फलों के रस
हालांकि फल आवश्यक विटामिन, खनिज और फाइबर के अच्छे स्रोत होते हैं, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को सभी फल नहीं खाना चाहिए। कुछ फलों में प्राकृतिक चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जैसे आम, केला, लीची, चीकू और अंगूर।
इनका अत्यधिक सेवन ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। वहीं फलों के रस में भी फाइबर निकल जाता है और उसका मिठास और बढ़ जाता है, जिससे वे पूरे फल की तुलना में ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। डायबिटीज के मरीजों को इन मीठे फलों का सेवन सीमित मात्रा में और सोच-समझकर करना चाहिए, खासकर एक बार में एक से ज्यादा फल न खाएं। सेब, अमरूद, जामुन, संतरा और पपीता जैसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले और फाइबर युक्त फल बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
-------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।