सिगरेट के डब्बे पर लिखी वैधानिक चेतावनी को अधिकांश लोग जानकर भी नजरअंदाज करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी होता है कि वे जानते हैं कि इससे नुकसान हो सकता है, इसके बावजूद वे यह विचार मन में रखते हैं कि नजरअंदाज करने से शायद मुश्किल भी टल जाएगी। क्या सच में ऐसा होता है? जवाब है नहीं। हो सकता है सिगरेट के धुएं या निकोटीन से होने वाली समस्या हर व्यक्ति को अलग अलग तरह से परेशान करे या अलग अलग समय पर परेशान करे, लेकिन परेशानी तो होगी ही।
World Diabetes Day 2022: सिगरेट पीने वाले हो सकते हैं डायबिटीज की समस्या से पीड़ित, जानें इसका असर
शुगर और असंतुलन
यह याद रखना सबसे जरूरी है कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो रिवर्स नहीं होती। लेकिन यह भी उतना ही सही है कि इस बीमारी को शुरूआती अवस्था में ही कंट्रोल में ले आना बहुत आसान होता है। इतना ही नहीं यदि नियंत्रण के सभी उपाय, सही तरीके से अपनाये जाएँ तो जीवन भर इसे कंट्रोल में रखकर अच्छी जिंदगी जी जा सकती है। हमारे शरीर में पेट में पीछे की ओर होता है एक छोटा सा अंग पैंक्रियाज। इस अंग की भूमिका डायबिटीज के मामले में बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी जगह बनता है इन्सुलिन हार्मोन जिसके असंतुलन से ही पनपती है डायबिटीज की स्थिति।
बेचारा पैंक्रियास
अब गड़बड़ कई स्तरों पर होती है। पेट में पीछे की और चुपचाप बैठा पैंक्रियास अपना काम करता रहता है। वह इन्सुलिन का उत्पादन करता है और शरीर उसकी मदद से अपना काम संतुलित तरीके से चला रहा होता है। लेकिन हम इस पैंक्रियास को छेड़ते हैं, असमय, अनियंत्रित और अनावश्यक प्रकार के खान-पान, ठीक से नींद न लेकर, फिजिकली एक्टिव न रहकर। खासकर टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में। इसकी वजह से शुगर का संतुलन गड़बड़ाता है और केवल डायबिटीज ही नहीं कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
निकोटीन का बुरा असर
अध्ययनों की मानें तो सिगरेट पीने वालों को टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका सिगरेट न पीने वालों की तुलना में 30-40 प्रतिशत तक अधिक हो सकती है। वहीं अगर पहले से डायबिटीज है तो ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना मुश्किल होता है। सिगरेट में मौजूद निकोटीन न केवल ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाता है बल्कि इसकी वजह से इन्सुलिन रजिस्टेंस, कोशिकाओं की सूजन और वजन बढ़ने जैसी स्थितियां भी पनप सकती हैं जो कहीं न कहीं डायबिटीज से जुड़ती हैं। इतना ही नहीं निकोटीन की वजह से बुरे कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसराइड की मात्रा बढ़ने लगती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटने लगती है। ये भी आगे जाकर टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ते हैं।
अगर है पहले से डायबिटीज
आप सिगरेट पीते हैं और पहले से डायबिटीज के भी मरीज हैं तो यह करेला और नीम चढ़ा की कहावत को सच कर सकता है। डायबिटिक लोगों में निकोटीन की वजह से ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना मुश्किल होने लगता है। यदि आप इन्सुलिन लेते हैं तो इसकी मात्रा को बढ़ाना पड़ सकता है। धूम्रपान के साथ अनियंत्रित डायबिटीज मिलकर पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है और इससे हृदय रोगों, आँखों की समस्याओं, स्ट्रोक, किडनी की समस्याओं, नर्व डैमेज और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यह उन लोगों की तुलना में भी अधिक होता है जो डायबिटिक हैं लेकिन धूम्रपान नहीं करते।