देश में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी से भारत में आई वायरस की दूसरी लहर में संक्रमितों के साथ मौत के आंकड़े में भी बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टर तमाम प्रयासों के माध्यम से लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालिया दिनों में संक्रमण के गंभीर रोगियों के लिए देश में रेमेडिसविर और फेवीफ्लू जैसी दवाइयों की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि दवाइयों की उपलब्धता इतनी कम है कि लोगों के लिए इसका मिल पाना भी कठिन हो रहा है।
बड़ी राहत: कोरोना के खिलाफ प्रभावी इस दवा के इस्तेमाल को मिली मंजूरी, संक्रमितों की जान बचाने में है कारगर
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देश में रेमेडिसविर और फेवीफ्लू जैसी दवाइयों की भारी किल्लत के बीच डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई इस दवा को विशेषज्ञ वरदान के रूप में देख रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (इनमास) और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, हैदराबाद ने मिलकर 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) नामक इस कोरोना-रोधी दवा को तैयार किया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
परीक्षणों में दिखे बेहतर परिणाम
दवा के तीसरे चरण के परीक्षणों में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका इस्तेमाल अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार करने में काफी कारगर हो सकता है। इसके अलावा यह गंभीर मरीजों की मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी कम करने में भी सहायक है। महामारी के खिलाफ तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर डीआरडीओ ने अप्रैल 2020 में इस दवा को विकसित करने की पहल शुरू की थी।
वायरस को बढ़ने से रोकती है दवा
इनमास ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) की मदद से यह प्रयोग शुरू किया था। विशेषज्ञों ने पाया कि यह दवा सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करने के साथ वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
सफल रहे हैं सभी चरण के परीक्षण
मई से लेकर अक्टूबर 2020 के बीच दवा के दूसरे चरण के परीक्षणों में वैज्ञानिकों ने इसे कोविड-19 रोगियों के लिए सुरक्षित पाया था। इतना ही नहीं मरीजों की रिकवरी में भी इसके प्रभावी परिणाम देखने को मिले थे। दवा के पहले और दूसरे चरण के सफल परीक्षणों के आधार पर डीसीजीआई ने नवंबर 2020 में इसके तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षणों की मंजूरी दी थी। देश के 27 अस्पतालों में 220 रोगियों पर दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2021 के बीच दवा के तीसरे चरण के परीक्षणों को संपन्न किया गया। विशेषज्ञों को दवा के इस्तेमाल के सफलतम परिणाम देखने को मिले हैं।