डिप्रेशन यानी अवसाद, मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है जो चिंता और मूड में बदलाव का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को अवसाद के जोखिमों को लेकर ध्यान देते रहना और इससे बचाव करना बहुत आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञों के मुताबिक दुनियाभर में हर चार में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। समय के साथ यह जोखिम और भी बढ़ता जा रहा है, विशेषतौर पर कोरोना महामारी के दौरान की नकारात्मक परिस्थितियों ने इस जोखिम को और भी बढ़ा दिया है।
Brain Health: डिप्रेशन आपके मस्तिष्क में बढ़ा सकती है सूजन, ये स्थितियां भी ब्रेन के लिए बहुत हानिकारक
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डिप्रेशन का मस्तिष्क पर असर
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि डिप्रेशन की समस्या सिर्फ आपके मूड को ही प्रभावित नहीं करती, इसका मस्तिष्क की सेहत पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। अगर डिप्रेशन का समय पर इलाज न किया जाए तो यह मस्तिष्क में कई प्रकार के बदलाव का कारण भी बन सकती है। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि जो लोग एक दशक से अधिक समय तक अवसादग्रस्त रहे, उनमें ब्रेन इंफ्लामेशन की समस्या 30 फीसदी अधिक देखी गई है।
हालांकि सिर्फ डिप्रेशन ही मस्तिष्क में बदलाव का कारण नहीं बनती है, कुछ और भी स्थितियां ब्रेन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती हैं।
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी)
जब आप किसी दर्दनाक घटना से गुजरते हैं, तो आपका मस्तिष्क इसके लिए प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। अधिकांश लोग तो इससे अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ को इसके कारण लंबे समय तक तनाव विकार की समस्या हो सकती है। पीटीएसडी आपके ब्रेन के अमिगडाला (मस्तिष्क का वह हिस्सा जो भावनाओं को नियंत्रित करता है) को अति सक्रिय कर देता है जिसके कारण आपको निर्णय लेने और व्यवहार से संबंधित कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।
शराब का सेवन भी हो सकता है हानिकारक
शराब सिर्फ लिवर ही नहीं मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है। इससे धुंधली दृष्टि, बोलने में समस्या और स्मृति हानि हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाने लगती है। शोध से पता चलता है कि यह आपके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को भी सिकोड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि शराब पीने वाले लोगों का हिप्पोकैम्पस छोटा हो सकता है, यह ब्रेन का वो हिस्सा है जो सीखने और याददाश्त के लिए महत्वपूर्ण है।
माइग्रेन वाले भी रहें सावधान
जिन लोगों को माइग्रेन होता है उनके दिमाग की वायरिंग गड़बड़ हो सकती है। कुछ नसें तनाव या तेज रोशनी जैसे ट्रिगर्स पर अतिप्रतिक्रिया करती हैं, इस तरह की स्थिति के कारण मस्तिष्क में रक्त वाहिकाएं संकीर्ण हो सकती हैं। समय के साथ, क्रोनिक माइग्रेन के कारण आपके मस्तिष्क का ग्रे और सफेद पदार्थ नष्ट हो सकता है, जिसके कई प्रकार के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।