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3500 प्रजातियों में से सिर्फ मच्छरों की 100 नस्लें होती हैं इंसानों के लिए खतरनाक

Sat, 29 Sep 2018 02:53 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 29 Sep 2018 02:53 PM IST
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Dengue malaria chikungunya Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for humans

मच्छर के काटते ही वहां एकदम इतनी खुजली होने लगती है कि किसी भी व्यक्ति का मन करता होगा कि उसे झट से मार गिराए। मच्छरों के काटते ही लोगों को इस मौसम में डेंगू, मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के होने का खौफ सताने लगता है। पर क्या आप जानते हैं, पूरी दुनिया में मच्छरों की करीब 3500 प्रजातियां पाई जाती हैं। हालांकि इनमें से ज़्यादातर नस्लें इसानों को बिल्कुल भी तंग नहीं करतीं। ये मच्छर पौधों और फलों के रस पर जिंदा रहते हैं। मच्छरों की केवल छह फीसद प्रजातियों की मादाएं अपने अंडों के विकास के लिए इंसानों का खून पीती हैं। इंसानों का खून पीने वाले इन मादा मच्छरों में से भी आधी ही अपने अंदर बीमारियों के वायरस लिए फिरती हैं। यानी कुल मिलाकर मच्छरों की केवल 100 नस्लें ही ऐसी हैं, जो इंसानों के लिए नुकसानदेह हैं। लेकिन, इनका इंसानियत पर बहुत ही भयानक असर पडता है।

Dengue malaria chikungunya Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for humans
ब्रिटेन की ग्रीनिच यूनिवर्सिटी के नेचुरल रिसोर्स इंस्टीट्यूट के फ्रांसिस हॉक्स कहते हैं कि दुनिया की आधी आबादी पर मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। इंसान के तमाम मुश्किलात में से कइयों के लिए मच्छर जिम्मेदार होते हैं।

सबसे खतरनाक मच्छर-

-एडीस एजेप्टी- इस मच्छर से जीका, यलो फीवर और डेंगू जैसी बीमारियां फैलती हैं। ये मच्छर सबसे पहले अफ्रीका में जन्मा था। मच्छरों की ये प्रजाति आज दुनिया के तमाम गर्म देशों में पाई जाती है।
-एडीस एल्बोपिक्टस-इस मच्छर से भी यलो फीवर, डेंगू और वेस्ट नील वायरस फैलते हैं। ये मच्छर पहले-पहल दक्षिणी पूर्वी एशिया में पैदा हुआ था। मगर अब ये दुनिया के तमाम गर्म देशों में पाया जाता है।
-एनोफिलिस गैम्बियाई-इसे अफ़्रीकी मलेरिया मच्छर भी कहते हैं। मच्छर की ये नस्ल बीमारियां फैलाने में सब की गुरु कही जाती है।
 
Dengue malaria chikungunya Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for humans
मच्छरों से मलेरिया, डेंगू और यलो फीवर  के अलावा जीका वायरस भी फैलता है। पहले माना जाता था कि जीका वायरस से हल्का बुखार और बदन पर छाले भर पड़ते हैं। लेकिन वैज्ञानिक अब फिक्रमंद हैं क्योंकि जीका वायरस, गर्भ में पल रहे बच्चों को भी नुकसान पहुंचाता है इसका ताल्लुक माइक्रोसेफेली नाम की बीमारी से भी पाया गया है। ब्राजील में इसके शिकार कई बच्चे पैदा हुए हैं। माइक्रोसेफेली की वजह से बच्चे छोटे सिर वाले पैदा होते हैं।
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दुनिया के तमाम देश लोगों को मच्छरों के खतरों से आगाह करने के लिए बरसों से अभियान चला रहे हैं। लोगों को समझाया जाता है कि वो मच्छरदानी और बचाव के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें ताकि मच्छर उन्हें काट न पाएं। लेकिन, अब जबकि विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, तो क्या बीमारी फैलाने वाले मच्छरों का पूरी तरह से खात्मा करके इस चुनौती से निजात पाई जा सकती है?
 
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Dengue malaria chikungunya Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for humans
ब्रिटिश जीव वैज्ञानिक ओलिविया जडसन इस ख़्याल की समर्थक हैं। वो कहती हैं कि तीस तरह के मच्छरों का सर्वनाश करके हम दस लाख इंसानों की जान बचा सकते हैं। इससे मच्छरों की केवल एक फीसद नस्ल खत्म होगी। लेकिन, इंसानों का बहुत भला होगा।
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