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मच्छरों की 3500 प्रजातियों में से सिर्फ 100 नस्लें इंसानों के लिए होती हैं नुकसानदेह

Sat, 01 Sep 2018 08:47 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 01 Sep 2018 08:47 PM IST
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Dengue malaria chikungunya: Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for human beings

अक्सर जैसे ही आपकी नजर आपके हाथ पर बैठे किसी मच्छर पर पड़ती है तो झट से आपका दूसरा हाथ उसे मारने के लिए उठ जाता है। आपको डेंगू, मलेरिया जैसे जानलेवा बीमारियों के होने का खौफ सताने लगता है। रक क्या आप जानते हैं, पूरी दुनिया में मच्छरों की करीब 3500 प्रजातियां पाई जाती हैं। हालांकि इनमें से ज़्यादातर नस्लें इसानों को बिल्कुल भी तंग नहीं करतीं। ये मच्छर पौधों और फलों के रस पर जिंदा रहते हैं। मच्छरों की केवल छह फीसद प्रजातियों की मादाएं अपने अंडों के विकास के लिए इंसानों का खून पीती हैं। इंसानों का खून पीने वाले इन मादा मच्छरों में से भी आधी ही अपने अंदर बीमारियों के वायरस लिए फिरती हैं। यानी कुल मिलाकर मच्छरों की केवल 100 नस्लें ही ऐसी हैं, जो इंसानों के लिए नुकसानदेह हैं। लेकिन, इनका इंसानियत पर बहुत ही भयानक असर पडता है।

Dengue malaria chikungunya: Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for human beings
ब्रिटेन की ग्रीनिच यूनिवर्सिटी के नेचुरल रिसोर्स इंस्टीट्यूट के फ्रांसिस हॉक्स कहते हैं कि दुनिया की आधी आबादी पर मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। इंसान के तमाम मुश्किलात में से कइयों के लिए मच्छर जिम्मेदार होते हैं।

सबसे खतरनाक मच्छर-

-एडीस एजेप्टी- इस मच्छर से जीका, यलो फीवर और डेंगू जैसी बीमारियां फैलती हैं। ये मच्छर सबसे पहले अफ्रीका में जन्मा था। मच्छरों की ये प्रजाति आज दुनिया के तमाम गर्म देशों में पाई जाती है।
-एडीस एल्बोपिक्टस-इस मच्छर से भी यलो फीवर, डेंगू और वेस्ट नील वायरस फैलते हैं। ये मच्छर पहले-पहल दक्षिणी पूर्वी एशिया में पैदा हुआ था। मगर अब ये दुनिया के तमाम गर्म देशों में पाया जाता है।
-एनोफिलिस गैम्बियाई-इसे अफ़्रीकी मलेरिया मच्छर भी कहते हैं। मच्छर की ये नस्ल बीमारियां फैलाने में सब की गुरु कही जाती है।
 
Dengue malaria chikungunya: Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for human beings

मच्छरों से मलेरिया, डेंगू और यलो फीवर  के अलावा जीका वायरस भी फैलता है। पहले माना जाता था कि जीका वायरस से हल्का बुखार और बदन पर छाले भर पड़ते हैं। लेकिन वैज्ञानिक अब फिक्रमंद हैं क्योंकि जीका वायरस, गर्भ में पल रहे बच्चों को भी नुकसान पहुंचाता है इसका ताल्लुक माइक्रोसेफेली नाम की बीमारी से भी पाया गया है। ब्राजील में इसके शिकार कई बच्चे पैदा हुए हैं। माइक्रोसेफेली की वजह से बच्चे छोटे सिर वाले पैदा होते हैं।

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Dengue malaria chikungunya: Out of 3500 Species of mosquitoes only 100 are harmful for human beings
- फोटो : demo
दुनिया के तमाम देश लोगों को मच्छरों के खतरों से आगाह करने के लिए बरसों से अभियान चला रहे हैं। लोगों को समझाया जाता है कि वो मच्छरदानी और बचाव के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें ताकि मच्छर उन्हें काट न पाएं। लेकिन, अब जबकि विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, तो क्या बीमारी फैलाने वाले मच्छरों का पूरी तरह से खात्मा करके इस चुनौती से निजात पाई जा सकती है?
 
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ब्रिटिश जीव वैज्ञानिक ओलिविया जडसन इस ख़्याल की समर्थक हैं। वो कहती हैं कि तीस तरह के मच्छरों का सर्वनाश करके हम दस लाख इंसानों की जान बचा सकते हैं। इससे मच्छरों की केवल एक फीसद नस्ल खत्म होगी। लेकिन, इंसानों का बहुत भला होगा।

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