सितंबर-अक्तूबर के महीने में हर साल देशभर में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इस बार भी इसके खतरे को लेकर डॉक्टर अलर्ट कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली सहित उत्तराखंड, जम्मू, हिमाचल और कई अन्य राज्यों से डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं।
Dengue: डॉक्टर बोले- बढ़ते डेंगू के खतरे से बच्चों को रखें सुरक्षित, बचाव के लिए ये उपाय जरूरी
डेंगू के कुछ मामले हो सकते हैं गंभीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में डेंगू की कुछ स्थितियां जैसे समय पर लक्षणों पर ध्यान न देना या फिर देखभाल में कमी के कारण निमोनिया, कार्डियोमायोपैथी, लिवर की समस्याओं और आईसीयू में भर्ती होने का भी खतरा बढ़ा सकती है। इस तरह के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए बचाव के उपायों के बारे में बच्चों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। स्कूलों को भी डेंगू से बचाव के लिए प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि बच्चों के दिन का ज्यादातर समय स्कूलों में ही बीतता है।
आइए जानते हैं कि बच्चों को डेंगू से बचाने के लिए डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए करें प्रयास
डेंगू के मामलों के गंभीर लक्षण विकसित होने का खतरा उन बच्चों/लोगों में अधिक होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए आहार को ठीक रखना बहुत आवश्यक है। बच्चों के आहार में प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। डेयरी उत्पाद, हल्दी, अदरक, लहसुन, खट्टे फल और नट्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के साथ शरीर को आंतरिक शक्ति भी देते हैं।
बच्चों को पहनाएं पूरी आस्तीन के कपड़े
डेंगू से बचाव के लिए जरूरी है कि शरीर को पूरी तरह से कवर करके रखें। डेंगू के मच्छर दिन के समय में ज्यादा काटते हैं, ऐसे में इनसे बचाव के लिए बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। इसके अलावा स्कूल में साफ-सफाई और मच्छरों के काटने से बचाव के लिए भी उपाय किया जाना चाहिए। मच्छरों को मारने वाली दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए।
डेंगू के लक्षणों को न करें अनदेखा
डेंगू संक्रमण की स्थिति के गंभीर रूप लेने का जोखिम तभी होता है जब इसके लक्षणों की समय पर पहचान न हो पाए और रोग का इलाज न मिले। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को अगर तीन-चार दिनों से अधिक समय से तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, त्वचा पर दाने, पेट की समस्याएं और उल्टी जैसी दिक्कत हो रही है तो इस बारे में समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार किया जाना चाहिए। समय पर लक्षणों की पहचान करके रोग को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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