संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शरीर और मन दोनों का ख्याल रखना बहुत आवश्यक माना जाता है। आमतौर पर हम तमाम तरह के उपाय करके शरीर को स्वस्थ रखने के तो उपाय करते रहते हैं, हालांकि इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वस्थ शरीर के लिए मन का स्वस्थ होना बहुत आवश्यक होता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों, विशेषकर कोरोना के दौर में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है। चिंता, अवसाद और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं पहले की तुलना में काफी आम हो गई हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: ऐसी आदतें बढ़ा देती हैं डेमेंशिया का खतरा, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं यह गलतियां?
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आहार में पौष्टकता की कमी
यदि आपका आहार स्वस्थ और पौष्टिक नहीं है तो कई तरह की शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, डेमेंशिया भी उनमें से एक है। न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को दूर रखने के लिए स्वस्थ आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। कई अध्ययनों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन मनोभ्रंश का खतरा कम कर सकता है। आहार में ओमेगा-3, प्रोटीन और खनिजों की कमी इस तरह के जोखिम को बढ़ा सकती है।
लोगों से अलग-थलग रहने की आदत
लोगों से दूरी बनाकर रखने की आपकी आदत मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है। कोरोना के इस दौर में आइसोलेशन जैसी गतिविधियों का लोगों के मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। सामाजिकता, आपको मस्तिष्क रूप से स्वस्थ रखने के लिए जरूरी होती है। दोस्तों के साथ घूमने, बातें करने, लोगों से मिलने और अपने बातें शेयर करने से डेमेंशिया जैसी कई गंभीर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
धूम्रपान की आदत है नुकसानदायक
धूम्रपान की आदत न सिर्फ आपके फेफड़ों के लिए खतरनाक है साथ ही इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर देखा जा सकता है। साल 2019 लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन में धूम्रपान को डेमेंशिया के प्रमुख कारणों में से एक बताया गया है। 37 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में, धूम्रपान करने वालों में मनोभ्रंश विकसित होने की आशंका 30 फीसदी और अल्जाइमर रोग विकसित होने की आशंका 40 फीसदी अधिक होती है।
व्यायाम न करने की आदत है नुकसानदायक
शारीरिक निष्क्रियता या व्यायाम न करने की आदत भी आपमें डेमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकती है। 11 अध्ययनों के परिणाम के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि नियमित व्यायाम से डेमेंशिया के विकास के जोखिम को लगभग 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। व्यायाम की आदत अल्जाइमर रोग के जोखिम को भी 45 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।