Medically Reviewed By-
भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। भारत में तेजी से बढ़ते संक्रमण के मामलों ने देश में तीसरी लहर की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़े के अनुसार बीते 24 घंटे में कोरोना के एक लाख 17 हजार नए मामले सामने आए हैं जो कि पिछले सात महीनों में सबसे अधिक है। वहीं देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमितों की संख्या भी बढ़कर 3000 के पार हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ओमिक्रॉन वैरिएंट अब तक का सबसे अधिक संक्रामक वैरिएंट है, हालांकि गंभीरता के मामले में अब भी डेल्टा वैरिएंट ही गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं, फिर भी डेल्टा अब भी बड़े संकट का कारण बना हुआ है। डेल्टा के कारण लोगों में अब भी गंभीर लक्षण और जटिलताएं देखने को मिल रही है, ऐसे में सभी लोगों को कोरोना से लगातार बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
कोरोना संकट: ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच अब भी बड़ी मुसीबत बना है डेल्टा, इस बात को लेकर चिंतित हैं विशेषज्ञ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनियाभर में जारी है डेल्टा का कहर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कोई दो राय नहीं है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता दर डेल्टा से अधिक है, हालांकि कई देशों में डेल्टा अब भी बड़ी मुसीबतों का कारण बना हुआ है। अमेरिका में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच अब भी डेल्टा से संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले काफी अधिक देखे जा रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 55,000 से अधिक कोविड-19 मरीज वर्तमान में अस्पताल में भर्ती हैं, इसमें से ज्यादातर लोग डेल्टा से संक्रमित हैं।
क्या है विशेषज्ञों की चिंता
अमर उजाला से एक बातचीत में इंटेंसिव केयर के वरिष्ठ डॉक्टर विवेक सहाय बताते हैं, देश में अब भी डेल्टा वैरिएंट के मामले देखे जा रहे हैं, ओमिक्रॉन के साथ डेल्टा के मामलों का सामने आना निश्चित ही काफी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। हमें नहीं पता कि कौन सा वैरिएंट हमें अपनी चपेट में ले लेगा, ऐसे में फिलहाल बचाव की एकमात्र तरीका है। कई रिपोर्ट्स में ओमिक्रॉन और डेल्टा के को-इंफेक्शन के मामले भी सामने आए हैं। यह लोगों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। ओमिक्रॉन के संक्रमण के बीच हमें डेल्टा के खतरे को नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए।
ओमिक्रॉन और डेल्टा का को-इंफेक्शन
मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ देशों में लोगों में डेल्मिक्रॉन के मामलों का जिक्र मिलता है। डेल्मिक्रॉन कोई नया वैरिएंट नहीं है। डेल्मिक्रॉन का मतलब किसी व्यक्ति में ओमिक्रॉन और डेल्टा वैरिएंट का एक साथ संक्रमण होना है। अमेरिका सहित कई देशों में रोगियों में ओमिक्रॉन और डेल्टा वैरिएंट के संयोजन के मामले सामने आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि चूंकि कोरोना के यह दोनों वैरिएंट बहुत संक्रामक और घातक हैं, ऐसे में इनसे एक साथ होने वाला संक्रमण बड़ी मुसीबतों का कारण बन सकता है।
बचाव करते रहना सभी के लिए जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में डेल्टा और ओमिक्रॉन के कारण जारी संक्रमण ने तीसरी लहर की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। डॉक्टर विवेक सहाय बताते हैं, देश में कोरोना के मामलों में उछाल में डेल्टा वैरिएंट की भी प्रमुख भूमिका है। ओमिक्रॉन निश्चित रूप से जिम्मेदार है, लेकिन साथ ही डेल्टा वैरिएंट के मामले अब भी चिंता का कारण बने हुए हैं। इस गंभीर समस्या से बचाव के लिए सभी लोगों को लगातार कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहने की आवश्यकता है।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।