Delhi Air pollution: राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों वायु प्रदूषण का व्यापक असर देखा जा रहा है। सोमवार की सुबह भी जब लोगों की आंख खुली तो चारों ओर धुंध और स्मॉग था। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, यहां हवा की क्वालिटी (एक्यूआई) 'बहुत खराब' स्तर में बनी हुई है। शहर के सात इलाकों में एक्यूआई लेवल गंभीर दर्ज स्तर पर किया गया। वहीं, औसत एक्यूआई 366 थी।
प्रदूषण और धुंध के साथ कोहरे का भी असर देखा जा रहा है, जिसके कारण जनजीवन और यातायत दोनों प्रभावित हैं।
राजधानी क्षेत्र में लगातार खराब स्तर में बनी हवा की गुणवत्ता का लोगों की सेहत पर भी सीधा असर देखा जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक पिछले एक महीन में सांस, गले में खराश, अनियमित हृदय गति सहित प्रदूषण जनित स्वास्थ्य समस्या वाले मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि प्रदूषण का सेहत पर तुरंत असर तो होता ही है साथ ही लगातार बनी रहने वाली खराब हवा की गुणवत्ता के कारण कई क्रॉनिक बीमारियों का भी लोगों में खतरा बढ़ गया है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
इसके अलावा एक अन्य रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से शारीरिक गतिविधियों से होने वाले स्वास्थ्य लाभ भी कम हो सकते हैं।
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प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियां
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प्रदूषण के कारण ओपीडी में बढ़े सांस के मरीज
दिल्ली में बढ़े प्रदूषण और इसके सेहत पर होने वाले असर के बारे में जानने के लिए हमने पश्चिमी दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉ आकाश गर्ग से बातचीत की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पिछले एक महीने में ओपीडी में सांस की शिकायत वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है। इसके अलावा लोग हृदय गति में अनियमितता, आंखों में जलन, सिरदर्द के साथ भी अस्पताल में आ रहे हैं। निदान के दौरान ज्यादातर लोगों में प्रदूषण के संपर्क को प्रमुख कारण पाया जा रहा है। जिन लोगों को पहले से इस तरह की कोई शिकायत नहीं थी उनमें भी जोखिम काफी बढ़ा हुआ देखा जा रहा है।
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दिल्ली में प्रदूषण का जोखिम
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प्रदूषण का सेहत पर देखा जा रहा गंभीर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करते रहने, शरीर को सक्रिय रखने की सलाह दी जाती रही है, हालांकि वायु प्रदूषण ने इन फायदों को भी सीमित कर दिया है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि जहरीली हवा के लगातार संपर्क में रहने से नियमित फिजिकल एक्टिविटी से होने वाले फायदे भी काफी कम हो सकते हैं। इस अध्ययन में ब्रिटेन, ताइवान, चीन, डेनमार्क और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे देशों में एक दशक से ज्यादा समय तक ट्रैक किए गए 15 लाख से ज्यादा वयस्कों के डेटा का अध्ययन किया गया।
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दिल्ली में वायु प्रदूषण और इसके साइड-इफेक्ट्स
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असमय मौत का भी बढ़ा खतरा
टीम ने पाया कि नियमित शारीरिक गतिविधि से लोगों में कैंसर और दिल की बीमारी सहित किसी अन्य कारणों से मौत का असमय जोखिम कम होता है। हालांकि जो लोग ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं, उनमें इसके लाभ कम देखे गए हैं। मसलन प्रदूषण ने शारीरिक गतिविधियों से होने वाले फायदों को भी कम कर दिया है।
टीम ने पाया कि जहां पीएम2.5 का सालाना औसत लेवल 25 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर या उससे ज्यादा था, वहां के लोगों में व्यायाम से होने वाले फायदे कम देखे गए। चिंताजनक बात ये है कि दुनिया की लगभग आधी (46%) आबादी ऐसे इलाकों में रहती है जो इस लिमिट से ज्यादा हैं।
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वायु प्रदूषण के क्या नुकसान हैं?
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ताइवान की नेशनल चुंग हसिंग यूनिवर्सिटी के लीड रिसर्चर, प्रोफेसर पो-वेन कू ने कहा, हमारे शोध की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि प्रदूषित माहौल में भी व्यायाम करना लाभकारी है। हालांकि, हवा की क्वालिटी में सुधार करने से इन फायदों को काफी बढ़ाया जा सकता है।
हमारा मानना है कि साफ हवा और फिजिकल एक्टिविटी दोनों ही सेहत के लिए जरूरी हैं, इसलिए हमें व्यापक रूप से सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदूषण के लेवल को कम करने वाले उपायों को कम करना चाहिए।
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स्रोत:
Air pollution may reduce health benefits of exercise
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