राजधानी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषित होती हवा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है। पिछले सात दिनों में यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में तेजी से गिरावट देखी जा रही है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के अधिकतर इलाकों में एक्यूआई को 400 से पार देखा गया। इस तरह की हवा की गुणवत्ता को सेहत के लिए बहुत हानिकारक माना जाता है।
Delhi Air Pollution: दूषित हवा के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए डॉक्टर ने बताए कारगर उपाय, आप भी कर दें शुरू
प्रदूषण से करें बचाव
अमर उजाला से बातचीत में श्वसन रोगों की विशेषज्ञ डॉ रुचिका श्रीवास्तव कहती है, हम वायु प्रदूषण के कारण और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं, लेकिन रोकथाम के मामले में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है, ये सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर दुष्प्रभावों वाली हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि हम सभी दिनचर्या में बदलाव करें और प्रदूषित हवा से बचाव के लिए गंभीरता से ध्यान दें।
मास्क पहनना सबसे कारगर तरीका
वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करना सबसे लाभकारी माना जाता है। विशेषतौर पर जब भी आप घर से बाहर जाएं मास्क जरूर पहनें। मास्क, हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को श्वसन मार्ग में प्रवेश से रोकता है, जिससे फेफड़ों और श्वसन मार्ग को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। प्रदूषित हवा से बचाव के लिए अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाएं या अगर बाहर जाना ही है तो मास्क पहनें।
इनडोर पॉल्यूशन भी खतरनाक
डॉ रुचिका बताती हैं, बाहर की प्रदूषित हवा जितनी खतरनाक है, इनडोर पॉल्यूशन के भी इसी तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे घर में वायु की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इनडोर प्लांट लगाएं जिससे ऑक्सीजन के स्तर को ठीक रखा जा सके। कमरों में वेंटिलेशन की अच्छी व्यस्था सुनिश्चित करें जिससे अंदर की हवा बाहर जा सके।
हाइड्रेशन का ध्यान रखना बहुत जरूरी
वायु प्रदूषण के कारण होने वाले दुष्प्रभावों से बचाव के लिए जरूरी है कि आप हाइड्रेशन का विशेष ध्यान रखें। शरीर में पानी की कमी होने से वायु प्रदूषण के गंभीव दुष्प्रभाव हो सकते हैं। पानी पीते रहने से आपको बेहतर सांस लेने में मदद मिलती है। ये फेफड़ों, ब्रोन्कियल नलिकाओं और नासिका मार्ग को नम रखता है, जिससे सांस की समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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