शरीर के किसी अंग में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि होने लगे तो यह कैंसर का प्रमुख कारण बनती है। दरअसल, शरीर की जरूरत के अनुसार कोशिकाएं बंट जाती हैं, लेकिन जब यह लगातार बढ़ने लगती हैं तो कैंसर का रूप ले लेती हैं। ये कोशिकाएं गांठ में बदल जाती है। ठीक ऐसा ही ब्रेस्ट यानी स्तन के कैंसर में भी होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चे पैदा नहीं करना, अधिक उम्र में पहला बच्चा होने, स्तनपान नहीं कराने, अनियंत्रित वजन बढ़ना, बिगड़ती जीवनशैली या ज्यादा शराब पीने के कारण स्तन कैंसर होता है। यह बीमारी अनुवांशिक भी होती है। पिछले दिनों स्तन कैंसर के बारे में एक चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
अमेरिका में लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी में हुई इस रिसर्च में कहा गया है कि डेयरी का दूध महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 80 फीसदी तक बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक डेयरी का दूध कम मात्रा में लेने पर भी यह खतरा रहता है। हालांकि दूध के सेवन पर यह बात निर्भर है। रिसर्च से जुड़े गैरी ई. फ्रेजर का कहना है कि डेयरी का दूध हर दिन एक चौथाई या एक तिहाई कप पीने से भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। यह रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुई है।
इस रिसर्च में 53,000 उत्तर अमेरिकी महिलाओं के खानपान का अवलोकन और मूल्यांकन किया गया। इनमें से सभी महिलाओं को शुरुआत में कैंसर नहीं था। इन महिलाओं पर आठ साल तक स्टडी की गई। आहार का 24 घंटे मूल्यांकन किया गया। इसके साथ ही उनकी जनसांख्यिकी, शारीरिक गतिविधियां, शराब की खपत, ब्रेस्ट कैंसर का अनुवांशिक और पारिवारिक इतिहास देखा गया। इसके साथ ही हार्मोनल और अन्य दवाओं का इस्तेमाल, स्त्री रोग और प्रजनन संबंधी गतिविधियों की स्टडी देखी गई।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, हर दिन एक कप दूध पीने से जोखिम 50 फीसदी तक बढ़ जाता है, जबकि हर दिन दो से तीन कप दूध पीने वालों के लिए यह जोखिम 70 से 80 फीसदी हो जाता है। स्टडी में पाया गया कि 54 हजार में से 1,057 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। उनके खानपान का विश्लेषण करने पर सोया उत्पादों और ब्रेस्ट कैंसर के बीच कोई सीधा लिंक सामने नहीं आया। शोधकर्ताओं के मुताबिक फैट और कम फैट या नॉनफैट दूध का सेवन करने से भी परिणाम में थोड़ा अंतर था।
डॉक्टर फ्रेजर के मुताबिक, डेयरी फूड, खासकर दूध का सेवन करने से स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक डेयरी दूध के विकल्प के तौर पर सोया दूध का इस्तेमाल यह खतरा कम करता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक डेयरी दूध से स्तन कैंसर का संभावित कारण डेयरी दूध का सेक्स हार्मोन कंटेंट हो सकता है। गाय भी स्तनपान कराती हैं और अक्सर डेयरी में लगभग 75 फीसदी गर्भवती होती हैं। कुछ अन्य रिसर्च में डेयरी और अन्य जानवरों के प्रोटीन का सेवन हार्मोन के हाई ब्लड लेवल, इंसुलिन जैसी बढ़ोतरी कारक-1 के साथ भी जुड़ाव पाया गया है, जो कैंसर का जोखिम बढ़ाने का कारण होता है।