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पीने से पहले जान लें: क्या पैकेट वाला जूस सच में फल जितना हेल्दी है?
Thu, 08 Oct 2026 04:46 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 08 Oct 2026 04:46 PM IST
सार
Packaged Juice Side Effects: इस लेख में जानें कि पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी है, इसमें मौजूद शुगर सेहत पर कैसे असर डाल सकती है और जूस की जगह पूरा फल खाना क्यों बेहतर विकल्प माना जाता है।
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पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
Packaged Juice Side Effects: पैकेट वाला फ्रूट जूस अक्सर हेल्दी ड्रिंक के तौर पर देखा जाता है। सुबह नाश्ते के साथ या बच्चों के टिफिन में इसे शामिल करना कई घरों में आम है। लेकिन पैकेट पर लिखे ‘फ्रूट जूस’ या ‘100% जूस’ को देखकर इसे ताजे फल का विकल्प मान लेना सही नहीं है।
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पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
पैकेट वाले जूस में कितनी चीनी होती है?
पैक्ड जूस में चीनी की मात्रा ब्रांड, फ्लेवर और पैक के आकार के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए हर जूस में एक जैसी मात्रा मानना सही नहीं है। जूस खरीदते समय लेबल पर कुल शुगर और ऐडेड शुगर की मात्रा जरूर देखें। अगर किसी 200 ml ड्रिंक में 24 ग्राम शुगर है, तो यह करीब 6 चम्मच चीनी के बराबर होती है। हालांकि प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर और अलग से डाली गई चीनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पैक्ड जूस में चीनी की मात्रा ब्रांड, फ्लेवर और पैक के आकार के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए हर जूस में एक जैसी मात्रा मानना सही नहीं है। जूस खरीदते समय लेबल पर कुल शुगर और ऐडेड शुगर की मात्रा जरूर देखें। अगर किसी 200 ml ड्रिंक में 24 ग्राम शुगर है, तो यह करीब 6 चम्मच चीनी के बराबर होती है। हालांकि प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर और अलग से डाली गई चीनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
पूरे फल और जूस में क्या अंतर है?
पूरा फल फाइबर का अच्छा स्रोत होता है। फाइबर पाचन को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद करता है। वहीं जूस में फल का फाइबर कम या काफी हद तक अलग हो सकता है, खासकर जब जूस को छानकर तैयार किया गया हो। इसी वजह से रोजाना फल खाने को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। फल खाने से चबाने की प्रक्रिया भी होती है, जिससे एक ही समय में बहुत अधिक मात्रा में शुगर लेना मुश्किल होता है।
पूरा फल फाइबर का अच्छा स्रोत होता है। फाइबर पाचन को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद करता है। वहीं जूस में फल का फाइबर कम या काफी हद तक अलग हो सकता है, खासकर जब जूस को छानकर तैयार किया गया हो। इसी वजह से रोजाना फल खाने को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। फल खाने से चबाने की प्रक्रिया भी होती है, जिससे एक ही समय में बहुत अधिक मात्रा में शुगर लेना मुश्किल होता है।
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पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
क्या पैकेट वाला जूस कोल्ड ड्रिंक से ज्यादा खतरनाक है?
ऐसा कहना सही नहीं है कि हर पैकेट वाला जूस कोल्ड ड्रिंक से ज्यादा खतरनाक होता है। दोनों की पोषण संरचना अलग हो सकती है। कुछ जूस में प्राकृतिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन उनमें शुगर भी काफी हो सकती है। इसलिए किसी भी ड्रिंक को सिर्फ ‘फ्रूट’ या ‘हेल्दी’ लिखे होने के आधार पर रोजाना बड़ी मात्रा में पीना सही नहीं है।
ऐसा कहना सही नहीं है कि हर पैकेट वाला जूस कोल्ड ड्रिंक से ज्यादा खतरनाक होता है। दोनों की पोषण संरचना अलग हो सकती है। कुछ जूस में प्राकृतिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन उनमें शुगर भी काफी हो सकती है। इसलिए किसी भी ड्रिंक को सिर्फ ‘फ्रूट’ या ‘हेल्दी’ लिखे होने के आधार पर रोजाना बड़ी मात्रा में पीना सही नहीं है।
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पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
बच्चों को पैकेट वाला जूस देना कितना सही?
बच्चों को रोजाना मीठे पेय देने की आदत उनकी कुल शुगर खपत बढ़ा सकती है। मीठे पेय की जगह बच्चों को पूरा फल और सामान्य पानी देना बेहतर विकल्प हो सकता है। जूस देना हो तो मात्रा और लेबल पर ध्यान देना जरूरी है।
बच्चों को रोजाना मीठे पेय देने की आदत उनकी कुल शुगर खपत बढ़ा सकती है। मीठे पेय की जगह बच्चों को पूरा फल और सामान्य पानी देना बेहतर विकल्प हो सकता है। जूस देना हो तो मात्रा और लेबल पर ध्यान देना जरूरी है।