शरीर को फिट और स्वस्थ बनाए रखने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से योग-व्यायाम करते रहने की सलाह दी जाती है। नियमित व्यायाम की आदत आपकी शारीरिक निष्क्रियता को कम करके शरीर को फिट रखने और बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी आयु वर्ग के लोगों को नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। विशेषकर उम्र बढ़ने के साथ व्यायाम की आदत आपके लिए काफी मददगार हो सकती है क्योंकि बुढ़ापे में शारीरिक निष्क्रियता के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।
Health Tips: विशेषज्ञों ने बताया- इन कारणों से उम्रदराज लोगों को जरूर करना चाहिए व्यायाम, जानिए इसके क्या लाभ हैं?
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शारीरिक निष्क्रियता के कारण होने वाली दिक्कतें
गतिहीन जीवनशैली हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और गठिया जैसे समस्याओं के जोखिम को दोगुना कर देती है। हृदय रोग और मधुमेह की समस्या अब कम उम्र वालों में भी देखी जा रही है। इसके अलावा अध्ययनों से पता चलता है कि व्यायाम न करने की आदत पेट के कैंसर, उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोपोरोसिस, लिपिड विकार, अवसाद और चिंता के जोखिम को भी बढ़ाती है। उम्र बढ़ने के साथ इन समस्याओं का जोखिम और भी अधिक हो जाता है।
हड्डियों और मांसपेशियों की समस्या से रहेंगे सुरक्षित
बुढ़ापे में व्यायाम की आदत हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने, रक्त संचार को ठीक रखने और इससे संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक निष्क्रियता के कारण गठिया की दिक्कत काफी आम देखी जाती है। यदि आप नियमित व्यायाम की आदत बनाते हैं तो ऑस्टियोपोरोसिस सहित हड्डियों-जोड़ों की समस्या के खतरे को कई गुना तक कम कर सकते हैं।
नीद संबंधी विकारों से बचाव
सोने में असमर्थता या नींद की कमी, बुजुर्गों में एक आम शिकायत है। नियमित व्यायाम की दिनचर्या बनाए रखने से बेहतर नींद में लेने में मदद मिल सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की कमी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। नींद विकारों को चिंता-तनाव की समस्या से लेकर हृदय-रक्तचाप की समस्याओं के कारक के तौर पर जाना जाता है।
क्रोनिक बीमारियों से मिलती है सुरक्षा
नियमित व्यायाम की आदत आपको बुढ़ापे तक कई तरह की क्रोनिक बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग से काफी हद तक सुरक्षित रखने में सहायक है। यह हृदय स्वास्थ्य, पाचन स्वास्थ्य आदि को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकती है। नियमित व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन का उत्पादन उत्तेजित होता है जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक है। बुढ़ापे में इसका खतरा अधिक होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।