जानें क्या है खर्राटों और डिमेंशिया के बीच संबंध? शोधकर्ताओं को पता चली यह रोचक बात
खर्राटों से परेशान लोगों को कॉटीन्यू पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) नामक उपचार दिया जाता है। विशेषज्ञों ने पाया है कि उपचार की यह पद्धति डेमेंशिया जैसी गंभीर और असाध्य मानसिक बीमारी के इलाज में भी प्रभावी हो सकती है। दुनियाभर में डेमेंशिया के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आइए इस इलाज के बारे में जानते हैं।
सीपीएपी उपचार की पद्धति में बेड के पास रखे एक मशीन से जुडे मास्क को रात में पहनना होता है। जो लगातार गले में हवा के दबाव को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह सोते वक्त गले में सॉफ्ट टिशू को नष्ट होने से भी रोकने में सहायता करता है। आमतौर पर इसकी कीमत 500 पाउंड यानी करीब 52 हजार रुपए होती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि चूंकि यह मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ाती है जिसके कारण लोगों में डेमेंशिया के जोखिम को कम किया जा सकता है। मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बहुत ज्यादा खर्राटों से परेशान लोगों के इलाज करने का मतलब है कि उन्हें डिमेंशिया होने की संभावना कम है?
स्रोत और संदर्भ:
Obstructive sleep apnea treatment and dementia risk in older adults
https://umich.altmetric.com/details/102832772
अस्वीकरण नोट: यह लेख मिशिगन विश्वविद्यालय के स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।