कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल 53.61 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। वैक्सीन की प्रभाविकता को बढ़ाने के लिए समय-समय पर नियमों में आवश्यक बदलाव किया जाता रहा है। टीकाकरण को लेकर बनाए गए सरकारी पैनल के सुझावों के आधार पर मई माह में केंद्र सरकार ने कोवीशील्ड वैक्सीन के दो डोज के अंतराल को छह से आठ हफ्तों से बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया था। विशेषज्ञों का कहना था कि डोज के अंतराल को बढ़ाकर वैक्सीन की प्रभाविकता में भी इजाफा किया जा सकता है। हालांकि अब इस बदलाव को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
मुद्दा: क्या कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज में लंबे अंतराल के नहीं हैं कोई फायदे? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
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कोविशील्ड की दो डोज में अंतराल
गौरतलब है कि टीकाकरण को लेकर बनाए गए सरकारी पैनल राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने कोवीशील्ड वैक्सीनेशन की डोज के अंतराल को बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने का सुझाव दिया था, जिसे 13 मई को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया था। इससे पहले कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज में अंतराल छह से आठ हफ्तों का था।
इस निर्णय को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला भी प्रभावकारिता और प्रतिरक्षात्मकता, दोनों ही दृष्टिकोणों से फायदेमंद बताया था। इसके अलावा तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन इस फैसले को बेहतर बताया था। हालांकि अब एसआईआई के संस्थापक इसे महज खुराक की कमी के कारण लिया गया फैसला बता रहे हैं।
तीसरी डोज की आवश्यता
एसआईआई के संस्थापक कहते हैं, वैक्सीन की दो डोज को ही कोरोना से मुकाबले के लिए काफी नहीं माना जा सकता है। सामान्यतौर पर छह महीने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज कम हो जाती हैं, ऐसे में तीसरी खुराक की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने और कंपनी के सात से आठ हजार कर्मचारियों ने वैक्सीन की बूस्टर डोज ले ली है। जिन लोगों ने वैक्सीन की दो डीज ले लीं हैं, उन्हें बूस्टर डोज की रूप में तीसरी खुराक भी ले लेनी चाहिए। संक्रमण से पूर्ण सुरक्षा के लिए यह जरूरी माना जा रहा है।
क्या साल के अंत तक सभी वयस्कों का हो सकता है टीकाकरण?
गौरतलब है कि सरकार ने इस साल के अंत तक देश के 18 से ऊपर के सभी लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है, हालांकि इस लक्ष्य को लेकर एसआईआई के संस्थापक ने संदेह जताया है। पूनावाला कहते हैं, यह लक्ष्य कैसे पूरा किया जाएगा इसपर मुझे संदेह है। एक महीने में 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करना आसान काम नहीं है। भारत बड़ा देश है, सरकार का यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है।
वैक्सीन कॉकटेल को बताया बैड आइडिया
साइरस पूनावाला ने वैक्सीन के मिक्स-एंड-मैच को लेकर अस्वीकृति व्यक्त करते हुए इसे बैड आइडिया करार दिया है। साइरस पूनावाला का कहना है कि वैक्सीन कॉकटेल की प्रभाविकता को लेकर फिलहाल ज्यादा साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं। पूनावाला कहते हैं, अगर कॉकटेल वैक्सीनेशन के बाद किसी के साथ कुछ गलत होता है तो दो वैक्सीन निर्माताओं के बीच एक दूसरे के टीके में दोष खोजने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो सकती है। ऐसे में किसी भी नजरिए से मिक्स-एंड-मैच वैक्सीन के आइडिया को फायदेमंद नहीं माना जा सकता है।
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नोट: यह लेख सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला के हालिया बयान के आधार पर तैयार किया गया है।
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