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Fact Check: क्या कोविड वैक्सीन लेने वालों की दो साल में हो जाएगी मौत? खतरनाक रूप ले रहा है वायरस?

Sat, 29 May 2021 11:54 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 29 May 2021 11:54 AM IST
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कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम - फोटो : social media

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। हालांकि जब से देश में टीकाकरण की शुरुआत हुई है, तब से वैक्सीन को लेकर फैल रही तमाम तरह की खबरें लोगों को भ्रमित कर रही हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों ने वैक्सीन की प्रभाविकता और इसकी सुरक्षा को लेकर लोगों को बार-बार जागरूक किया है, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रही कुछ सूचनाएं ध्यान भटकाने वाली हैं।


पिछले दिनों सोशल मीडिया पर प्रख्यात फ्रांसीसी वायरोलॉजिस्ट और नोबेल पुरस्कार विजेता ल्यूक मॉन्टैग्नियर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो वैक्सीन को लेकर लोगों में डर पैदा करने के लिए काफी है। चूंकि ल्यूक दुनियाभर में प्रख्यात हैं ऐसे में लोग इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर रहे हैं। आइए जानते हैं इस वायरल पोस्ट में ऐसा क्या है जो लोगों में वैक्सीन को लेकर डर का माहौल बना रहा है?

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है खबर - फोटो : Pixels
क्या है वायरल पोस्ट
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने कोरोना वायरस का टीकाकरण करा लिया है, उन सभी की दो साल के भीतर मौत हो जाएगी। इस पोस्ट में नोबेल पुरस्कार विजेता ल्यूक मॉन्टैग्नियर के हवाले से कहा जा रहा है- जिन लोगों ने कोरोना का टीका लगवा लिया है, उनके बचने की कोई संभावना नहीं है। कोरोना की यह वैक्सीन शरीर में एंटीबॉडी डिपेंडेंट इनहैसमेंट का कारण बन रही है, जिसके चलते कोरोना वायरस और अधिक गंभीर रूप ले रहा है। इसका कोई भी उपचार नहीं है।
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कोरोना वैक्सीन कितनी प्रभावी? - फोटो : Pixabay

एंटीबॉडी डिपेंडेंट इनहैसमेंट क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि वैक्सीन मुख्यरूप से वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने में मदद करती हैं। इस दौरान शरीर में कई ऐसी एंटीबॉडीज भी बन जाती हैं जो वायरस को पकड़ तो लेती हैं लेकिन उसे संक्रमण फैलाने से नहीं रोक पाती हैं। ऐसी स्थिति में संक्रमण बढ़ जाता है, इस प्रक्रिया को एंटीबॉडी डिपेंडेंट इनहैसमेंट कहा जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में इसी तरह से वैक्सीन से बने कथित एंटीबॉडी डिपेंडेंट इनहैसमेंट को लेकर चिंता जाहिर की गई है।

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सरकार ने वैक्सीन को बताया काफी असरदार - फोटो : social media
क्या है इस पोस्ट की सच्चाई?
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि इस तरह का दावा पूरी तरह से झूठा है, कृप्या इनपर भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर कोविड-19 के टीके को लेकर फ्रांसीसी नोबेल पुरस्कार विजेता के तस्वीर के साथ कथित बयान को फैलाया जा रहा है, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। इस तरह की बातों पर भरोसा न करें, वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है।
 
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पीआईबी फैक्ट चेक - फोटो : PIB
क्या ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने ऐसा कुछ कहा था?
अमेरिका स्थित आरएआईआर फाउंडेशन ने 18 मई 2021 को ल्यूक मॉन्टैग्नियर का इंटरव्यू प्रसारित किया था। इसके बाद 25 मई को एक लेख प्रकाशित कर स्पष्ट किया है कि ल्यूक ने वैक्सीन के कारण दो साल में मौत होने जैसी बात कही ही नहीं थी। उन्होंने बस यह कहा था कि वैक्सीन के कारण कोरोना के नए वैरियंट्स पैदा हो सकते हैं। ल्यूक पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। इससे पहले अप्रैल 2020 में उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस को इंसानों ने बनाया है।

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नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।
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